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बिहार: 15 साल से नीतीश की सहयोगी हैं रेणु, अब बन रहीं बीजेपी में बदलाव का चेहरा

चुनावी हलफनामे के मुताबिक, रेणु देवी के पास 3 करोड़ 7 लाख रुपए हैं। वे इंटर पास हैं और उनके पास राइफल और पिस्तौल हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र पटना | Updated: November 16, 2020 10:09 AM
भाजपा नेता रेणु देवी का संघ से भी जुड़ाव रहा है। (फोटो- ANI)

बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही एनडीए में सरकार बनाने और नेता चुनने को लेकर जद्दोजहद जारी है। जदयू के पास 43 सीटें आने के बावजूद गठबंधन ने उन्हें ही सीएम पद सौंपा है। हालांकि, भाजपा ने इस बार सुशील मोदी को डिप्टी सीएम के पद से हटा दिया। माना जा रहा है कि उनकी जगह इस बार बिहार में दो डिप्टी सीएम नियुक्त किए जाएंगे। इनमें एक नाम कटिहार से विधायक चुने गए तारकिशोर प्रसाद का है, जबकि दूसरा नाम बेतिया से विधायक रेणु देवी का है। ये दोनों ही नेता बिहार की राजनीति में काफी अनुभवी माने जाते हैं। साथ ही संघ से दोनों का जुड़ाव भी उनके नेतृत्व में शामिल किए जाने की वजह माना जा रहा है।

कौन हैं रेणु देवी?: बेतिया के एक साधारण परिवार में जन्मीं रेणु देवी का संघ से काफी जुड़ाव रहा है। तीन भाई और पांच बहनों में सबसे बड़ी रेणु की शादी कलकत्ता के एक इंजीनियर दुर्गा प्रसाद के साथ हुई थी। हालांकि, पति के निधन के बाद उन्होंने अपने मायके बेतिया को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। राजनीतिक करियर शुरू होने के बाद रेणु देवी ने 2000 में पहली बार चुनाव लड़ा और बेतिया के तत्कालीन राजद विधायक बीरबल यादव को पराजित किया। इसके बाद 2005 में फरवरी में हुए चुनाव में उन्होंने राजद के मंगल यादव को शिकस्त दी।

2005 के नवंबर में उन्होंने फिर चुनाव जीता। अपनी मजबूत महिला नेता की छवि के लिए उन्हें नीतीश सरकार में युवा-संस्कृति मंत्री का पद सौंपा गया। 2010 में वे फिर विधायक बनीं। 2015 में रेणु देवी को कांग्रेस के मदनमोहन तिवारी ने दो हजार मतों से हराया था। पर इस साल चुनाव में रेणु देवी ने वापसी करते हुए मदनमोहन तिवारी को फिर हराया। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, रेणु देवी के पास 3 करोड़ 7 लाख रुपए हैं। वे इंटर पास हैं और उनके पास राइफल और पिस्तौल हैं।

40 साल भाजपा के साथ राजनीतिक सफर में जुड़े हैं तारकिशोर प्रसाद: बिहार भाजपा की बैठक में विधान मंडल के नेता चुने गए तारकिशोर प्रसाद के भी उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चा है। माना जा रहा है कि उन्हें सुशील मोदी की जगह सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था। 5 जनवरी 1956 को सहरसा के सलखउआ में जन्में तारकिशोर भाजपा से 1980 से जुड़े हैं। यानी पार्टी को खड़ा करने से लेकर उसे सत्ता में लाने तक तारकिशोर ने अहम भूमिका निभाई। वे संघ से जुड़े रहे हैं और एबीवीपी में 1974 से 1978 तक अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

तारकिशोर प्रसाद एबीवीपी के दिनों में आपातकाल के विरोध में खड़े होने वाले नेताओं में थे। वे अंडरग्राउंड होकर आंदोलन चलाते थे। 2005 में पहली बार विधायक बने तारकिशोर अब तक चुनाव नहीं हारे हैं। चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक, तारकिशोर प्रसाद की संपत्ति 1.9 करोड़ रुपए है। उनकी कमाई के मुख्य जरिए कृषि और व्यापार हैं।

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