उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को भीषण गर्मी में बिजली कटौती का दंश नहीं झेलना पड़ेगा। विभाग ने गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने इस वर्ष लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई है।
इस कार्य के लिए सभी नए थर्मल पावर संयंत्र इकाइयों को चालू कर दिया गया है। वहीं, करीब 80 फीसद बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू से पूरी की जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त मांग को बिजली विनिमय के जरिए पूरा किया जाएगा। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि पिछले वर्षों की मांग को देखते हुए इस वर्ष जून में मांग लगभग 33,375 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक होगी। मई और जुलाई में भी मांग 31 से 32 हजार मेगावाट के बीच रहने की संभावना है।
इस बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग ने अग्रिम तैयारी करते हुए उत्पादन और आपूर्ति के सभी स्रोतों को सक्रिय कर दिया है। वहीं बड़ी मांग को ध्यान में रखते हुए लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि सभी नए थर्मल पावर संयंत्र की इकाइयों को चालू कर दिया गया है। घाटमपुर, खुर्जा, पनकी, ओबरा और जवाहरपुर जैसे प्रमुख परियोजनाओं से उत्पादन शुरू हो चुका है।
इन परियोजनाओं के चालू होने से प्रदेश की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं घाटमपुर की तीसरी यूनिट 30 अप्रैल तक चालू हो जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। करीब 80 फीसद बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू के जरिए पूरी की जाएगी। इससे अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में भी स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
इसके साथ ही शेष मांग को पूरा करने के लिए बिजली विनिमय मंच जैसे आईईएक्स, पीएक्सआईएल और एचपीएक्स की मदद ली जाएगी। इससे न केवल मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को कटौती से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा कुछ राज्यों के साथ लगभग 4,663 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली की बैंकिंग व्यवस्था की गई है।
यह भी पढ़ें – दूसरे राज्य में वाहन ले जाने वाले सावधान! कहीं आप भी तो नहीं छोड़ रहे अपना हक? जानें रिफंड का नियम
गौतमबुद्ध नगर में अपने वाहनों को अन्य राज्यों में स्थानांतरित करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन जानकारी के अभाव में वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। परिवहन नियमों के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपने वाहन को पंजीकरण अवधि (10 या 15 वर्ष) पूरी होने से पहले दूसरे राज्य में ले जाकर वहां पुन: पंजीकृत कराता है, तो शेष अवधि का अग्रिम पथ कर उसे वापस मिलना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…
