Delhi News: दिल्ली के विकास प्राधिकरण ने बुधवार को दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी। इसमें
बाहरी दिल्ली में ज्यादा घनत्व वाले विकास को आसान बनाने और मौजूदा रिहायशी इलाकों के पुनर्विकास को आसान बनाने के लिए किए गए बदलाव शामिल हैं।

अगले दो दशकों में दिल्ली के डेवलपमेंट का विजन तय करने वाला यह ड्राफ्ट प्लान अब फाइनल मंजूरी और नोटिफिकेशन के लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा। इन बदलावों का मुख्य मकसद राष्ट्रीय राजधानी में डेवलपमेंट के लिए और जमीन उपलब्ध कराना है, क्योंकि यहां घरों की मांग लगातार बढ़ रही है और विकास के लिए जगह सीमित है।

सूत्रों के मुताबिक, डीडीए को उम्मीद है कि ड्राफ्ट मास्टर प्लान के तहत लैंड पूलिंग के नियमों में ढील देकर, छोटे प्लॉट के रीडेवलपमेंट की इजाजत देकर और एक्सप्रेसवे के आस-पास ज्यादा घनत्व वाले निर्माण की मंजूरी देकर मार्केट में ज्यादा घर और कमर्शियल स्पेस लाए जा सकेंगे। पिछले दो दशकों में शहर में घरों और कमर्शियल स्पेस में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है।

डीडीए और उपराज्यपाल के कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय की ओर से अगले कुछ दिनों में इस ड्राफ्ट प्लान का नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है।

लैंड पूलिंग के नियमों में ढील

लैंड पूलिंग पॉलिसी में कई बदलाव किए गए हैं। इसके तहत, जमीन के मालिक अब डीडीए द्वारा जमीन अधिग्रहण के बजाय, सुनियोजित और घनी आबादी वाले विकास के लिए अपनी जमीन को स्वेच्छा से एक साथ मिला (पूल कर) सकते हैं।

2019 में जारी किए गए पूर्व नियमों के तहत, किसी क्षेत्र के 70% भूस्वामियों को एक साथ आकर एक संघ बनाना होता था। यह एक प्रतिनिधि संस्था होती थी जो जमीन मालिकों की ओर से सेक्टर के विकास से जुड़े फैसले लेने के लिए जिम्मेदार होती थी।

इस घटनाक्रम से परिचित एक सूत्र ने बताया, “अभी संघ बनाने की जरूरत नहीं है। भूस्वामी सीधे डीडीए से संपर्क कर सकते हैं और डीडीए योजना बनाने में मुख्य भूमिका निभाएगा।” सूत्रों के अनुसार, भूस्वामियों के विकास योजनाओं पर बार-बार मतभेद होने के कारण एक संघ का गठन करना मुश्किल था।

सूत्रों के मुताबिक, डीडीए ने जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी एक और अड़चन को भी दूर कर लिया है। पहले, अगर किसी जमीन के टुकड़े का इस्तेमाल कंसोर्टियम के प्रस्तावित सेक्टर प्लान से अलग होता था, तो हर बार उसका इस्तेमाल बदलना पड़ता था। नई पॉलिसी के तहत, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव अपने-आप प्रस्तावित सेक्टर प्लान के हिसाब से हो जाएगा।

छोटे प्लॉट के लिए पुनर्विकास का प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक, इस प्लान में मौजूदा कॉलोनियों के पुनर्विकास को आसान बनाने का प्रस्ताव है। पुरानी पॉलिसी के तहत, पुनर्विकास के लिए कम से कम 4 हेक्टेयर जमीन वाले मालिकों को एक साथ आना पड़ता था। जमीन मालिकों के बीच मतभेदों के कारण अक्सर ऐसा करना मुश्किल होता था।

एक सूत्र ने कहा, “अब, 3,000 वर्ग मीटर जमीन वाला मालिक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत पुनर्विकास का प्रस्ताव दे सकता है, जिससे ज्यादा लोगों के लिए इसमें शामिल होना आसान हो जाएगा।”

अधिकारियों ने संकेत दिया कि पुनर्विकास के लिए चुने गए इलाकों में घने निर्माण की भी इजाजत दी जाएगी, ताकि ऐसे प्रोजेक्ट आर्थिक रूप से फायदेमंद हों और ज्यादा जमीन मालिक इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित हों। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद कई रिहायशी इलाकों में बेतरतीब विकास की समस्या को दूर करना और साथ ही अतिरिक्त घरों और बुनियादी ढांचे के लिए गुंजाइश बनाना है।

एक्सप्रेसवे के पास ज्यादा घनत्व की इजाजत

ड्राफ्ट योजना के तहत, डीडीए ने एक्सप्रेसवे के पास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के लिए प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। अप्रैल में अधिसूचित टीओडी नीति के अनुसार, सरकार ने मेट्रो कॉरिडोर के पास घने निर्माण की इजाजत दी थी। एक सूत्र ने बताया, “एमपीडी-2047 में हम एक्सप्रेसवे के पास भी ज़्यादा घने निर्माण की इजाज़त दे रहे हैं।”

इन उपायों से ज्यादा घनत्व वाले विकास और पुनर्विकास के लिए और जमीन उपलब्ध होने की उम्मीद है। डीडीए को उम्मीद है कि इससे हाउसिंग और कमर्शियल यूनिट्स की संख्या बढ़ेगी और आखिकार कीमतें कम होंगी।

प्लान में पांच साल से ज्यादा की देरी

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में बुधवार को हुई डीडीए की बैठक में एमपीडी-2047 को मंजूरी दी गई। यह कई सालों की देरी के बाद आया है। एमपीडी-2041 को डीडीए ने 28 फरवरी 2023 को मंजूरी दी थी और उसी साल 13 अप्रैल को अधिसूचना के लिए मंत्रालय को भेजा गया था। हालांकि, कुछ नीतियों पर मतभेदों के कारण यह तीन साल से अधिक समय तक लंबित रहा। इसने कई समय सीमाएं भी चूक दीं, जिनमें 2024 में नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद एमओएचए द्वारा निर्धारित 100 दिन की समय सीमा भी शामिल है।

डीडीए के प्रवक्ता ने कहा, “दिल्ली की आबादी में 2047 तक काफी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसे देखते हुए मास्टर प्लान हाउसिंग, आर्थिक विकास, मोबिलिटी, पर्यावरण स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाता है।”

भारतीय जनता पार्टी के नेता और डीडीए सदस्य राजीव बब्बर ने कहा, “यह योजना किफायती आवास और राष्ट्रीय राजधानी में भीड़भाड़ कम करने पर केंद्रित है।” ग्रामीण समूह ‘दिल्ली देहात विकास मंच’ की दिल्ली मास्टर प्लान समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र बाजद ने अनुमान लगाया कि एमपीडी-2047 और लैंड पूलिंग पॉलिसी के लागू होने से दिल्ली में 25 लाख करोड़ रुपये से 30 लाख करोड़ रुपये का वैश्विक निवेश आएगा।

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दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देखने वाले सरकारी कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स के लिए गुड न्यूज है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ‘DDA कर्मजीवी आवास योजना 2026’ लॉन्च करने का ऐलान किया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…