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2002 से लेकर 2018 तक ऐसे रहे झड़ापिया-मोदी के रिश्ते, इस तरह आया उतार-चढ़ाव

नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद और 2019 में प्रधानमंत्री बनने की दोबारा दावेदारी के बीच पार्टी के कई दिग्गजों से उनके रिश्तों में तनातनी बढ़ी। बीजेपी के यूपी प्रमुख बने गोवर्धन झड़ापिया भी उनमें से एक हैं।

पूर्व में गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी के साथ गोवर्धन झडापिया। (एक्सप्रेस फोटो)

नरेंद्र मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद और 2019 में प्रधानमंत्री बनने की दोबारा दावेदारी के बीच पार्टी के कई दिग्गजों से उनके रिश्तों में तनातनी बढ़ी। इन नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त है, जिनमें संजय जोशी, केशुभाई पटेल, यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, लालकृष्ण आडवाणी के साथ-साथ गोवर्धन झड़ापिया का नाम भी शामिल है। मोदी के लिए गुजरात के अलग-अलग विधानसभा चुनाव में कई पटेल नेता चुनौती बने। झड़ापिया भी उनमें से एक हैं। कभी उन्होंने मोदी को गुजरात की सत्ता से बेदखल करके प्रधानमंत्री बनने का सपना तोड़ने की मुहिम भी चलाई थी, लेकिन बीजेपी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य का प्रभारी बनाया। जानिए 2012 से अब तक कैसे बनते-बिगड़ते रहे मोदी-झड़ापिया के रिश्ते…

…ऐसा रहा मोदी और झड़ापिया का खट्टा-मीठा रिश्ता

  • 2002 के गुजरात दंगों के दौरान झड़ापिया नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार में गृह मंत्री थे। हालांकि, उसी साल के अंत में हुए चुनाव के बाद मोदी ने उन्हें कैबिनेट से बाहर कर दिया।
  • 2007 के गुजरात विधानसभा के दौरान झड़ापिया ने मोदी को रोकने के लिए अपनी नई पार्टी महागुजरात जनता पार्टी (एमजेपी) बनाई और चुनाव लड़े। उस चुनाव में नरेंद्र मोदी ने 182 में से 117 सीटों पर जीत दर्ज की।
  • 2012 में विधानसभा चुनाव से पहले झड़ापिया ने अपनी पार्टी को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के बागी केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी से हाथ मिलाया और अपनी पार्टी का विलय कर दिया।
  • 2012 में संजय जोशी के बीजेपी से इस्तीफा देने पर झड़ापिया ने यह भी कहा था कि जोशी को मोदी की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। भविष्य में मोदी की वजह से पूरी बीजेपी को दिक्कत होगी।
  • 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 24 फरवरी को करीब 11 साल के अंतराल के बाद झड़ापिया ने एक बार फिर बीजेपी का दामन थामा। उस दौरान उन्होंने उन्हीं नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने के लिए जमकर प्रचार किया, जिनका विरोध करने के लिए उन्होंने पार्टी तक छोड़ दी थी।

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