वर्षाें से पुराना किला में संरक्षित करके रखे गए पुरावशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने गुरुवार से लालकिला स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। कई गाड़ियों में लकड़ी के डिब्बों में बंद करके अवशेषों को लालकिला भेजा जा चुका है और अभी लगातार कई दिनों तक इन्हें भेजा जाएगा क्योंकि पुरावशेषों की संख्या तकरीबन तीन लाख है। ये पुरावशेष पाषाण काल से लेकर ब्रिटिश साम्राज्य तक के हैं, जिन्हें आने वाले समय में लालकिला में पर्यटकों को देखने का मौका मिल सकता है।
एएसआइ के अधिकारियों का कहना है कि इन पुरावशेषों को लालकिला परिसर में ब्रिटिश काल के दौरान बनाए गए भवनों, जिन्हें ‘कालोनियल बिल्डिंग’ कहा जाता है उसकी बी-चार इमारत में रखा जाएगा। आने वाले समय में एएसआइ इन भवनों को संग्रहालय के रूप में परिवर्तित करेगी। मालूम हो कि पहले से ही लालकिला परिसर के भीतर बने कई कालोनियल बिल्डिंग का प्रयोग एएसआइ संग्रहालय के रूप में कर रही है। बता दें कि पुरावशेषों के स्थानांतरण को लेकर एएसआइ के निदेशक (प्रशासन) प्रवीण कुमार त्रिपाठी ने 2 फरवरी 2026 को ही नाराजगी जाहिर करते हुए आदेश जारी किया था।
पुरावशेषों के स्थानांतरण में केंद्रीय पुरातन संग्रह (सीएसी) की ओर से देरी हुई
आदेश में कहा गया था कि इन पुरावशेषों के स्थानांतरण में केंद्रीय पुरातन संग्रह (सीएसी) की ओर से देरी हुई है। जिसके बाद पुराना किला स्थित सक्षम प्राधिकारी को निर्देशित किया गया कि वह सभी पुरावशेषों को दिल्ली के लालकिले स्थित बी-चार की पहली और दूसरी मंजिल में स्थानांतरित कर दें जोकि गुरुवार से शुरू किया जा चुका है। जबकि पुराना किला में पुरावशेषों में रखे गए मृदुभांडो (मिट्टी के बर्तनों) को ग्रेटर नोएडा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान में स्थानांतरित किए जाने का निर्देंश दिया गया है। साथ ही विभागीय अधिकारियों को पुरावशेषों की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करवाने के निर्देश भी दिए गए थे।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पुराना किला में संरक्षित करके रखे गए पुरावशेषों को वर्ष 1974 में सफदरजंग मकबरे से लाया गया था। पुराना किला में रखे गए पुरावशेष सिर्फ एएसआइ द्वारा भारत व पुरानाकिला में उत्खनन के दौरान प्राप्त नहीं हुए बल्कि एएसआइ ने मिश्र, अफगानिस्तान, पाकिस्तान सहित जिन देशों में भी उत्खनन का कार्य किया, वहां से लाकर संरक्षित किए गए थे।
इसके अलावा बड़ी संख्या में वह पुरावशेष भी हैं जो अन्य देशों द्वारा भारत को लौटाए गए थे। सूत्रों के अनुसार, इन अवशेषों में 25 लाख ईसा पूर्व यानी पाषाण काल से लेकर मध्य पाषाण काल, नवपाषाण काल, ताम्रपाषाण काल, सिंधु घाटी व हड़प्पा सभ्यता, मौर्य काल, गुप्त काल, दिल्ली सल्तनत, मुगल व आधुनिक में औपनिवेशिक युग यानि ब्रिटिश साम्राज्य के पुरावशेष शामिल हैं।
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