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कौन हैं कर्नाटक के 16 बागी विधायक, प्रदेश की राजनीति में क्या है इनकी अहमियत? जानिए

कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों उठापटक मची हुई है। जद सेक्लयूलर और कांग्रेस के विधायकों के बागी तेवरों से सत्ताधारी गठबंधन परेशानी में हैं। जानते हैं इन विधायकों के बारे में

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बागी विधायक बृहस्पतिवार को मुंबई से कर्नाटक के लिए रवाना हो गए। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)
कर्नाटक में जनता दल सेक्यूलर और कांग्रेस के बागी विधायकों का रुख सत्ताधारी गठबंधन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इन विधायकों को मनाने के लिए मंत्री पद की पेशकश समेत तमाम प्रयास अभी तक सफल होते नहीं दिखाई दे रहे हैं। जानते हैं कौन हैं ये 16 विधायक और राज्य की राजनीति में इनकी क्या भूमिका है। इसमें सबसे पहला नाम कांग्रेस के विधायक आर. रामलिंगा रेड्डी का है। 66 वर्षीय रेड्डी 1990 के दशक से हर कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हैं।

पूर्व पार्षद होने के नाते इन्हें बेंगलुरु की राजनीति में इनकी पकड़ है और इन्हें सैकड़ों कॉन्ट्रेकरों का समर्थन है। शहर में कचरे से लेकर निर्माण तक अनेक कॉन्ट्रेक्ट पर इनका कंट्रोल रहता है। ये राज्य के उप मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। 69 वर्षीय एच. विश्वनाथ जेडीएस के विधायक हैं।

चार बार के विधायक विश्वनाथ पिछड़े कुरबा समुदाय से आते हैं। कुछ दिन पहले तक यह जेडीएस के प्रदेशाध्यक्ष थे। हाल ही में इन्हें जेडीएस में वोक्कालिगा धड़े से चुनौती मिल रही थी और इन्हें अलग-थलग कर दिया गया था। मुंबई जाने वाले विधायकों में यह भी शामिल थे। कांग्रेस के रोशन बेग 8 बार विधायक और छह बार मंत्री रह चुके हैं। नई सरकार में मंत्री नहीं बनाए जाने के लिए इन्होंने सिद्धारमैया को जिम्मेदार ठहराया था। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने इन्हें सस्पेंड दिया था।

कांग्रेस के रमेश झारकिहोली चार बार के विधायक हैं। इनका बेलगावी क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। 53 वर्षीय आनंद सिंह बेल्लारी के विजय नगर से विधायक हैं। ये विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। 61 वर्षीय एसटी सोमशेखर दक्षिण कर्नाटक से वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेताओं में से हैं। यह 2013 से ही मंत्री बनना चाहते थे।

कांग्रेस के बी. बसावराज को सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है। ओबीसी कुरबा समुदाय के नेता रियल स्टेट बिजनेस से जुड़े हैं। एन. मुनीरत्ना पहले ठेकेदार थे। इसके बाद पार्षद और फिर विधायक बने हैं। ये फिल्म प्रोड्यूसर भी हैं। 62 वर्षीय बीसी पाटिल पहले पुलिस में थे। इसके बाद इन्होंने फिल्मों में हाथ आजमाया। बाद में राजनीति में आ गए। मुंबई जाने वाले 7 विधायकों में यह भी शामिल थे।

कांग्रेस नेता पी. पाटिल भाजपा के टिकट पर भी विधायक बन चुके हैं। तीन बार के विधायक पाटिल पर भाजपा शुरू से ही नजर बनाए हुए थी। कांग्रेस विधायक शिवराम हैबर भी 2018 से ही भाजपा के निशाने पर थे। कांग्रेस विधायक महेश कुमाताहली साल 2018 से ही बागी रुख अपनाए हुए थे।

जेडीएस विधायक 56 वर्षीय नारायण गौड़ा कुमारस्वामी परिवार से नाराज बताए जाते हैं। जेडीएस विधायक के. गोपालैय्या उत्तर बेंगलुरु से विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट के बाद पार्टी ने इन्हें सस्पेंड कर दिया था। कांग्रेस विधायक एनटीबी नागराज रियल स्टेट बिजनेसमैन हैं। ओबीसी कुरबा समुदाय के इस नेता को सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है।

चिक्काबल्लापुर से कांग्रेस विधायक 45 वर्षीय के. सुधाकर समाजसेवा के बाद राजनीति में आए। दो बार के विधायक सुधाकर ने इस साल जनवरी से ही बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। सीएम कुमारस्वामी ने राज्य प्रदूषण बोर्ड के चेयरमैन के रूप में इनकी नियुक्ति का विरोध किया था।

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