Rats drank the missing alcohol, say Bihar cops in all soberness - Jansatta
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‘मूस-मयकशी’ के बाद जब्त मदिरा बहने लगी नालियों में

बिहार में पुलिस मालखाने में रखी शराब को मयकश चूहों के गटक जाने की खबर जब से सुर्खियों में आई है, तब से सुशासन बाबू की नींद हराम हो गई है।

Author भागलपुर | May 12, 2017 12:26 AM
बिहार में पुलिस मालखाने में रखी शराब को मयकश चूहों के गटक जाने की खबर जब से सुर्खियों में आई है, तब से सुशासन बाबू की नींद हराम हो गई है।

बिहार में पुलिस मालखाने में रखी शराब को मयकश चूहों के गटक जाने की खबर जब से सुर्खियों में आई है, तब से सुशासन बाबू की नींद हराम हो गई है। जिलों में अब जब्त शराब की बोतलों को तोड़ कर सड़क या नालियों में बहाया जा रहा है। पटना, पूर्णिया, सारण, कटिहार, वैशाली जिलों से ऐसी खबरें आ रही है। और अब यह सिलसिला चल पड़ा है। जिलों के डीएम और एसएसपी और एसपी रैंक के अफसरों की भी सोच है कि न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बुधवार को इस बाबत उच्चस्तरीय बैठक कर सख्त हिदायत दी है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सूबे के सभी डीएम और एसएसपी व एसपी से साफ कहा है कि मुझे समीक्षा नहीं कार्रवाई चाहिए। न शराब आए और न कोई पिए। बस दो टूक बात है। इसे ही सुनिश्चित करें। क्यों कि इस मुद्दे को जनता का समर्थन है। कुछ लोग यह धंधा कर माहौल गंदा कर रहे हैं।

हालांकि सुशासन बाबू की फिक्र और जिले की बेइज्जती के मद्देनजर जब्त शराब को बहा देने की सोच बनी है। पटना में 17586 शराब की बोतलों को सड़क पर बिछा रोडरोलर चला नष्ट कर दिया गया। वहां के डीएम संजय अग्रवाल ने यह काम मंगलवार को अपनी निगरानी में कराया। इन बोतलों में 9645 लीटर विदेशी शराब थी। इससे पहले आर्थिक अपराध शाखा ने सारण जिले में जब्त 685 कार्टून विदेशी शराब को नालियों में बहाया था।

भागलपुर रेल पुलिस ने भी शराब से भरी एक हजार से ज्यादा बोतल को फोड़कर गटर में बहा दिया। इसी तरह पूणर््िाया के एसपी निशांत तिवारी के मुताबिक ज़िले में जब्त 4932 लीटर विदेशी और 4279 लीटर देशी शराब को नष्ट किया गया है। मसलन पूर्णिया में अब तक जब्त शराब का कतरा-कतरा नालियों में बहाकर नष्ट कर दिया है। कटिहार में बुधवार को हजारों लीटर दारू एक कुएं में डाल आग लगा दी गई। आग लगाने के दौरान जोरदार विस्फोट भी हुआ। यह तो गनीमत रही कि आग के एकबेग उठे गुब्बार की चपेट में वहां खड़े तमाशबीन नहीं आए। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। यों शराब बंदी कानून के बाद यानी 5 अप्रैल 2016 से लेकर 8 मई 2017 तक सूबे में 2 लाख 46 हजार 717 छापेमारी हुई है। इसमें 45230 मामले दर्ज किए गए। इनमें 50343 जनों को गिरफ्तार कर 50306 लोगों को जेल भेजा गया।

छापेमारी में 3 लाख 56 हजार 21 लीटर देसी, 5 लाख 96 हजार 937 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। इसके अलावे 55058 लीटर स्प्रिट, 11415 लीटर बीयर, 117613 लीटर चुलाई वाली दारू और 7629 मसालेदार देसी शराब बरामद की गई। जाहिर है रोक के बाद भी शराब माफिया की सक्रियता की वजह से बिहार में यह धंधा फल-फूल रहा है। तभी इतनी तादाद में जब्ती हुई है। इससे कहीं अधिक पी ली गई होगी। जब्ती का बाकायदा यह सरकारी आंकड़ा है जो मुख्यमंत्री के सामने बुधवार को पेश किया गया। यह सच है कि झारखंड , नेपाल, बंगाल और उत्तरप्रदेश और असम से बिहार आने वाली ट्रेनें मयखाना एक्सप्रेस बनी है। रोजाना शराब में टुन्न हो दर्जनों पुलिस की गिरफ्त में आते भी है। पर बेखौफ यह सिलसिला जारी है। जब्त शराब को मालखाने में न रख अब नष्ट करने की नीति भी अपने मातहतों की बेजा करतूत की वजह से बनी है। देखना है कहीं इसमें भी चूहे छेद न कर दे।

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