उत्तराखंड स्थित जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला क्षेत्र में दुर्लभ प्रजाति का उल्लू देखा गया है। इससे पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पक्षी प्रेमी अब तक यह मान चुके थे कि यह दुर्लभ प्रजाति का उल्लू क्षेत्र से गायब हो गया है परंतु अचानक इसके मिलने से उनमें यह आशा जगी है कि यह फिर से जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व की शान को बढ़ाएगा। इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए पार्क प्रशासन, पक्षी प्रेमी और विज्ञानी सामूहिक रूप से विभिन्न प्रयासों में जुड़ गए हैं।

जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के रामनगर वन प्रभाग के सीतावनी और रिगोड़ा क्षेत्रों में दुर्गा प्रजाति का उल्लू दिखाई दिया है। जिसका अंग्रेजी नाम स्पाट -लीड इंगल-आउल है। इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू के मिलने से वन्यजीव प्रेमी काफी खुश नजर आए हैं। इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू को अपने कमरे में कैद वन्यजीव प्रेमी दीप रजवार ने किया है।

उनका कहना है कि यह उनके जीवन में सबसे ज्यादा खुशी के पल है, जब उन्होंने जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के एक दुर्लभ स्थान पर दुर्लभ प्रजाति के उल्लू को अपने कैमरे में कैद किया। रजवार बताते हैं कि इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू को स्थानीय भाषा में ‘जंगल का भूत’ भी कहा जाता है। क्योंकि इसकी चमकती नारंगी आंखें और रात के सन्नाटे को चीरती इसकी डरावनी आवाज हर किसी को डराती है, इसलिए उसे जंगल की चुड़ैल या जंगल का भूत कहा जाता है।

करीब 20 से 25 इंच लंबा होता है ये उल्लू

करीब 20 से 25 इंच लंबा और लगभग दो किलोग्राम वजनी यह शक्तिशाली शिकारी उल्लू भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाया जाता है। दीप रजवार के मुताबिक, स्पाट बेलीड इंगल-आउल जंगल की खाक छानने के बाद ही देखने को मिलता है। क्योंकि उल्लू प्रजाति का यह अत्यंत दुर्लभ जीव है। इस दुर्लभ प्रजाति के पक्षी उल्लू को जंगल में रात का राजा कहा जाता है।

यह पक्षी रातभर जंगल में दौड़ भरता है और सुबह होने पर दिन में जंगल में घने पेड़ों की आड़ में शांत भाव में बैठा रहता है और छिप जाता है। रात शुरू होते ही यह अपने शिकार की खोज में निकल जाता है। यह मांसाहारी होता है और इसके आहार में मोर, खरगोश के बच्चे, छिपकलियां और अन्य छोटे जीव शामिल हैं।

‘महिलाओं के रोने जैसी आवाज निकालता हैं’

वन्यजीव प्रेमी संजय छिम्वाल का कहना है कि अंधविश्वास और लोककथाओं के पीछे असल में इसी उल्लू का जिक्र होता है। उन्होंने बताया कि स्पाट-बेलीड इंगल-आउल ही रात को महिलाओं के रोने जैसी आवाज निकालता हैं, जिसे लोग चुड़ैल की आवाज समझते है और डर से घरों से बाहर भी नहीं निकलते थे।

दुर्लभ प्रजाति के उल्लू पक्षी को जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में तीन अलग-अलग स्थानों पर कैमरे में कैद किया गया है। जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व में पहली बार ढिकाला क्षेत्र में, दूसरी बार सीतावनी में और हाल ही में रिंगोड़ा क्षेत्र मे इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू पक्षी को देखा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर के वन्य जीव पक्षी विज्ञानी दिनेश चंद्र भट्ट मानते हैं कि स्पाट बेलीड इंगल-आउल का जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में दिखना समृद्ध जैव विविधता का का परिचायक है। दुर्लभ प्रजाति के इस उल्लू स्पाट-बेलीड ईगल-आउल की आवाज वास्तव में रहस्यमयी और प्राकृतिक है।

रामनगर वनप्रभाग के वरिष्ठ अधिकारी अंकित बडोला ने बताया कि हम लोगों को पक्षी प्रेमियों की वजह से जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के सीतावनी क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू के रहने और खाने-पीने के स्थान के बारे में जानकारी मिली थी। स्थानीय लोग इसकी आवाज को सुनना अपशगुन मानते हैं। इसे स्थानीय लोग चित्तीदार उल्लू पक्षी भी कहते हैं।

जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व के रामनगर वन प्रभाग के सीतावनी और रिगोड़ा क्षेत्रों में दुर्गा प्रजाति का उल्लू दिखाई दिया है। जिसका अंग्रेजी नाम स्पाट -लीड इंगल-आउल है। इस दुर्लभ प्रजाति के उल्लू के मिलने से वन्यजीव प्रेमी काफी खुश नजर आए हैं। करीब 20 से 25 इंच लंबा और लगभग दो किलोग्राम वजनी यह शक्तिशाली शिकारी उल्लू भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाया जाता है।

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