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सगाई के बाद पता चली पत्नी के रेप की बात, तभी ले ल‍िया इंसाफ दिलाने का संकल्‍प: पर्दे पर आएगी संघर्ष की ये कहानी

सगाई के बाद जब मंगेतर ने बताया कि उसके साथ रेप हुआ है। इसके बावजूद युवक ने उस महिला से शादी की। आज दोनों मिलकर आरोपियों को सजा दिलवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

Author January 14, 2019 6:39 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर । (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

हरियाणा के ज‍ितेंद्र छत्तर इंसाफ की लड़ाई लड़ रहेे हैंं। उन्‍होंने कसम खाई है क‍ि वह अपनी पत्‍नी को इंसाफ द‍िला कर ही रहेंगे। उनकी पत्‍नी के साथ गैंगरेप हुआ था। सगाई होने तक ज‍ितेंद्र को यह बात पता नहीं थी। सगाई के बाद उन्हें पत्नी ने पूरी घटना बताई थी। ज‍ितेंद्र ने म‍िसाल पेश करते हुए न केवल शादी करने का फैसला क‍िया, बल्‍क‍ि तभी यह संकल्‍प भी ले ल‍िया क‍ि वह अपनी होने वाली पत्‍नी को इंसाफ द‍िलाएंगे। द‍र‍िंंदों को सजा द‍िला कर रहेंगे।

शादी से पहले जितेंद्र ने कानूनी प्रक्रिया शुरू करवा दी। लेक‍िन उनका संघर्ष जल्‍द खत्‍म होने वाला नहीं था। कुछ आरोपी ज‍िला अदालत से आरोपी बरी हो गए। वहीं, दो आरोपियों का ट्रायल चल रहा है। अब जितेंद्र बरी आरोपियों को सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में लड़ रहे हैं। उनके लाखों रुपए खर्च हो गए हैं। सो, वकील का खर्च बचाने के ल‍िए खुद वकालत की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी वकालत की पढ़ाई पूरी होने में अब मात्र एक साल शेष हैं। उनकी पत्नी भी वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। वे अभी फर्स्ट इयर में हैं। मकसद न केवल अपने ल‍िए इंसाफ पाना है, बल्‍क‍ि ग्रामीण क्षेत्र की ऐसी महिलाओं को कानूनी मदद देना भी है।

उनकी इस कहानी पर सामाजिक मामलों में नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म निर्माता विभा वक्शी एक डॉक्यूमेंट्री बना रही हैं। इस डॉक्यूमेंट्री का नाम ‘SON RISE’ है।  मंगलवार 15 जनवरी को दिल्ली में इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रीमियर है। जनसत्ता डॉट कॉम से बात करते हुए जितेंद्र ने बताया है, “कुछ साल पहले मेरी पत्नी के साथ आठ लोगों ने गैंगरेप किया था। इस दौरान उन्होंने उनकी तस्वीर खिंची और वीडियो भी बनाए। इन तस्वीरों की सहायता से ब्लैकमेल कर वे उनके साथ करीब डेढ़ वर्षों तक रेप करते रहे। यह तब की घटना है जब हमारी शादी नहीं हुई थी।”

जितेंद्र ने कहा, “सितंबर 2015 में हमारी सगाई हुई। इसके बाद मैंने चार महीने तक उन्हें नहीं देखा, जब तक कि शादी नहीं हो गई। हम फोन के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहे। मैं छत्तर का था, तो वह जिंद की। दोनों के बीच 30 किलोमीटर का फासला था। एक दिन, उन्होंने बताया कि कुछ जरूरी बात मुझे बताना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह एक रेप पीडि़ता हैं और वह नहीं चाहती कि एक झूठ के साथ संबंध की शुरुआत हो। उनकी आंखों में आंसू थे, उन्होंने मेरी ओर देखा और कहा, “मैं इस रिश्ते के लायक नहीं हूं। कृप्या मेरे साथ शादी न करें।”

पत्नी को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे जितेंद्र छत्तर ।

जितेंद्र ने आगे बताया, “मैंने मन में सोचा, ‘यदि मैं उनसे शादी नहीं करता हूं तो भगवान मुझे कभी माफ नहीं करेंगे।’ मैंने उनसे कहा, “मैं सिर्फ आपसे शादी ही नहीं करूंगा, बल्कि आपको न्याय भी दिलाऊंगा।’ न्याय की प्रक्रिया हमारी शादी से पहले शुरू हो गई। मैंने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, वकील नियुक्त करने और कानूनी प्रक्रिया शुरू करने में उनकी मदद की। कई बार मेरे और उनके परिवार को धमकी भी दी गई। इसके बावजूद दिसंबर 2015 में हमने शादी कर ली। वे सभी आदमी राजनीतिक रूप से मजबूत घरों के थे और धनी भी थे। हमारे खिलाफ झूठे मामले भी दर्ज करवाए गए। केस वापस लेने के लिए पैसों का भी ऑफर दिया गया। इन सब के बीच मेरे परिजन हमारे साथ खड़े रहे। हालांकि, यह लड़ाई काफी मुश्किल थी।”

जितेंद्र ने आगे बताया, “जिला अदालत द्वारा 6 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। वहीं, दो आरोपी का अभी ट्रायल चल रहा है। इस महीने की 18 तारीख को इस केस की सुनवाई है। अब मैंने बरी आरोपियों को सजा दिलवाने के मकसद से हाईकोर्ट में अपील की है। मुकदमा लड़ने के लिए अब तक करीब 14 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके लिए मुझे अपनी जमीन भी बेचनी पड़ी। हमारी मानसिक शांति खत्म हो चुकी है। मेरी पत्नी को आज भी बुरे सपने आते हैं। यह तभी दूर हो पाएगा जब आरोपियों को सजा मिलेगी। शादी के बाद मैंने अपनी पुश्तैनी कारोबार छोड़ दी और अब कानून की डिग्री ले रहा हूं ताकि मैं खुद अपनी पत्नी के केस को लड़ सकूं। मेरी पत्नी भी वकालत की पढ़ाई कर रही है। हम एक साथ वकालत की प्रैक्टिस करेंगे। ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में बदलाव लाएंगे।”

दरअसल, हरियाणा में महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं काफी ज्यादा होती है। आंकड़ों की बात करें तो सितंबर 2014 से अगस्त 2015 तक महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध के 8,126 मामले दर्ज किए गए। वहीं, सितंबर 2017 से सितंबर 2018 तक ऐसे मामले बढ़कर 10 हजार से ज्यादा हो गए। 2014-15 और 2017-18 के बीच महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मुख्यमंत्री तक ने कहा कि जिन जिलों में महिला थाना खोले गए वहां भी अपराध में कमी नहीं आयी।

आंकड़े यह भी बताते हैं कि सितंबर 2014 से अगस्त 2015 के बीच रेप के मामलों में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सितंबर 2014 से सितंबर 2015 तक रेप के दर्ज मामलों की संख्या 961 थी। वहीं, 2015 से 2016 के बीच बढ़कर यह संख्या 1,026 हो गई। 2016-17 में यह आंकड़ा 1,193 तक पहुंच गया और 2017-18 में संख्या 1,413 हो गई। वहीं, महिलाओं के अपहरण के मामले में 100 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई। डेटा से यह भी खुलासा होता है कि सितंबर 2014 से अगस्त 2015 और सितंबर 2018 के बीच छेड़खानी की घटनाएं 26 प्रतिशत तक बढ़ गई। ये आंकड़े सीएम मनोहर लाल खट्टर ने खुद सदन की पटल पर रखे थे।

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