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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- जवान कुर्बानी दे रहे, किसान पसीना बहा रहे लेकिन दोनों का उद्देश्य एक

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का जो लक्ष्य सरकार ने तय किया गया है उसे कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से पूरा किया जा सकता है।

Author कानपुर | February 14, 2018 6:41 PM
कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि के रूप में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का स्वागत कुलपति डॉ. सुशील सोलोमन और सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चरल प्रोफेशनल्स के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने किया। इ￰सके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कैलाश भवन सभागार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन किया। मंच पर राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल राम नाईक भी मौजूद रहे। साथ ही साथ इस सम्मेलन में जापान,नेपाल, भूटान आदि देशों के छह सौ प्रतिनिधियों और 15 कृषि वैज्ञानिको ने भी भाग लिया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में ‘जलवायु परिवर्तन के दौर में छोटे किसानों के लिए खेती कैसे लाभप्रद हो’ विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का जो लक्ष्य सरकार ने तय किया गया है उसे कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से पूरा किया जा सकता है। सरकार ने पर ड्रॉप मोर क्राॅप का संदेश दिया है जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सके। खाद्यान्न के साथ किसान मुर्गी पालन, बकरी पालन, दुग्ध उत्पादन कर सकते हैं। उनके उत्पादों का समय पर अच्छा मूल्य देने के लिए मार्केटिंग व फूड प्रोसेसिंग जैसी योजनाओं पर काम किया जा रहा है। छोटे किसानों को फूड प्रोसेसिंग से जोड़े जाने की जरूरत है। देश में 60 फीसद खेती बारिश पर आधारित है। ऐसे में प्रतिवर्ष 13 राज्यों को सूखे का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कहा था कि किसान देश के केंद्र बिंदु हैं। वे राष्ट्र के निर्माता होते हैं जिसको मैं भी मानता हूं।

अपने संबोधन में आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि कम पानी में उत्पन्न होने वाली फसलों व पानी का पूरा इस्तेमाल करने के बारे में किसानों को जागरूक करने की जरूरत है। हरियाणा के करनाल जिले में किसानों के समूह इस बात की मिसाल हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों की मदद से पराली से खाद बनाना प्रारंभ कर दिया है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली की आम की प्रजाति आम्रपाली व मल्लिका की हाईब्रिड प्रजाति से ओडिसा व झारखंड के किसानों की आय बढ़ाने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जो जय जवान व जय किसान का नारा दिया था। वह आज और भी प्रासंगिक हो गया है। क्योंकि आज जवान देश के लिए कुर्बानी दे रहे हैं और किसान खेतों पर पसीना बहा रहें हैं। दोनों की भूमिका कहीं से अलग नहीं है। क्षेत्र और काम अलग हो सकते हैं लेकिन दोनों का उद्देश्य एक ही है।

अंत में उन्होंने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, सोसाइटी फाॅर एग्रीकल्चर प्रोफेशनल व राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान जैसे नामी-गिरामी कृषि संस्थानों ने एक मंच पर आकर मिसाल पेश की है। इससे यह साबित होता है कि संस्था अनेक लेकिन उद्देश्य एक है। कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह, सोसाइटी फाॅर एग्रीकल्चर प्रोफेशनल के अध्यक्ष डा एके सिंह व कुलपति प्रो सुशील सोलोमन समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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