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राम बहादुर राय का विवादित बयान- डॉ. भीमराव आंबेडकर ने नहीं लिखा था संविधान

जब पूछा गया कि क्या तब अंबेडकर की भूमिका मिथक थी तो उन्होंने कहा, हां, मिथक है, मिथक है, मिथक है...।

Author नई दिल्ली | June 8, 2016 03:26 am
हिंदी के दिग्गज पत्रकार राम बहादुर राय

दिल्ली में सरकार द्वारा वित्तपोषित प्रमुख कला केंद्र इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए) के हाल ही में प्रमुख नियुक्त किए गए राम बहादुर राय ने संविधान बनाने में डॉ बीआर अांबेडकर की भूमिका पर सवाल खड़ा करके और इसे ‘मिथक’ बताकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व महासचिव राय के एक साप्ताहिक पत्रिका को दिए साक्षात्कार के अनुसार राय ने कहा कि आंबेडकर ने संविधान नहीं लिखा था। अप्रैल में आइजीएनसीए के अध्यक्ष नियुक्त किए गए राय के हवाले से ‘आउटलुक’ पत्रिका ने कहा कि अांबेडकर की भूमिका सीमित थी और तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी बीएन राऊ जो सामग्री आंबेडकर को देते थे, वे उसकी भाषा सुधार देते थे।

राय ने कहा, इसलिए संविधान आंबेडकर ने नहीं लिखा था। दरअसल उन्होंने कहा था कि अगर संविधान को कभी जलाना पड़ा तो मैं ऐसा करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा। जब पूछा गया कि क्या तब अंबेडकर की भूमिका मिथक थी तो उन्होंने कहा, हां, मिथक है, मिथक है, मिथक है…। यह पहचान की राजनीति का हिस्सा है। राय के बयान के बाद तत्काल उनकी आलोचना शुरू हो गई और भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष दुष्यंत कुमार गौतम ने विवादास्पद टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि यए बयान अांबेडकर के अपमान के समान हैं और दलितों से संपर्क साधने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों में बाधक हैं।

इस बारे में जब राय से संपर्क किया गया तो उन्होंने ऐसा कोई साक्षात्कार देने से इनकार करते हुए कहा कि यह ‘पत्रकारीय नैतिकताओं का उल्लंघन’ है। गौतम ने राय पर निशाना साधते हुए कहा, जो ऐसा कह रहे हैं, वे बिना सोच के ऐसा कह रहे हैं और ऐसा लगता है कि वे अनुसूचित जातियों और सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ दुर्भावना और शत्रुता रखते हैं।

उन्होंने कहा, यही वजह है, अन्यथा ऐसे बयान नहीं दिए जाते। अगर अांबेडकर ऊंची जाति से होते तो वे ऐसे बयान नहीं देते। राय की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि उन्हें साक्षात्कार के बारे में नहीं पता। पत्रिका ने राय के हवाले से लिखा कि संविधान पर नए सिरे से पुनर्विचार की जरूरत है।

साक्षात्कार के मुताबिक, राय ने कहा कि देश में कुछ मिथक गढ़े गए हैं और इनमें से एक है कि संविधान ‘मंदिर की प्रतिमा’ की तरह है जिसे कोई नहीं छू सकता। उन्होंने कहा, कुछ लोगों को लगता है कि अगर संविधान से छेड़छाड़ हुई तो बाबा साहब अांबेडकर के सपनों का क्या होगा। लेकिन बाबा साहब के सपनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए लोग इस संंसद में हैं, इसलिए यह खतरा नहीं है।

राय के बयान ऐसे समय में आए हैं जब भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले अनुसूचित जाति समुदाय के वोट को अपनी ओर लाने का प्रयास कर रही है। भाजपा उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आंबेडकर समाज के वंचित वर्गों, खासकर दलितों के उद्धार के सर्वोच्च आदर्श हैं।

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