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जयपुर ग्रामीण सीट: दो खिलाड़ियों में टक्कर, जो भी जीता केंद्र में मंत्री बना

भाजपा के राठौड़ इस इलाके के जाने पहचाने हैं और उन्होंने पूरे पांच साल तक स्थानीय जनता से संपर्क बनाए रखा। इसका लाभ अब उन्हें मिल रहा है। कांग्रेस की कृष्णा पूनिया इलाके के लिए एकदम नया चेहरा हैं। कांग्रेस ने उन्हें जातीय आधार पर इस संसदीय सीट पर उतार दिया।

Author May 3, 2019 3:19 AM
भाजपा ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पूनिया अंतराष्ट्रीय स्तर की एथलीट है।

राजस्थान में जयपुर ग्रामीण सीट इस बार दो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के मुकाबले के कारण रोचक बन गई है। परिसीमन के बाद 2009 में बनी इस सीट से हुए दो चुनावों में जो भी जीता वो केंद्र में मंत्री बना। इस बार भाजपा ने एक बार फिर केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मैदान में उतारा है। दूसरी तरफ कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पूनिया अंतराष्ट्रीय स्तर की एथलीट है। प्रचार के शुरुआती दौर में तो भाजपा के राठौड़ ने बढत बना ली थी पर अब जैसे-जैसे प्रचार अभियान परवान चढ़ा तो कांग्रेस की पूनिया ने मुकाबले को कांटे का बना दिया है। पूनिया इस इलाके के लिए नई हैं और अभी चूरू जिले से विधायक हैं।

भाजपा के राठौड़ इस इलाके के जाने पहचाने हैं और उन्होंने पूरे पांच साल तक स्थानीय जनता से संपर्क बनाए रखा। इसका लाभ अब उन्हें मिल रहा है। कांग्रेस की कृष्णा पूनिया इलाके के लिए एकदम नया चेहरा हैं। कांग्रेस ने उन्हें जातीय आधार पर इस संसदीय सीट पर उतार दिया। इस संसदीय सीट पर दो अंतरराष्ट्रीय खिलाडियों के बीच सियासत के मैदान में मुकाबला रोचक होता जा रहा है। कांग्रेस की पूनिया भी उनके मुकाबले की ही खिलाड़ी हैं और ओलंपिक खेलों में हिस्सा ले चुकी व राष्ट्रमंडल खेलों में एथलेटिक में स्वर्ण पदक विजेता रही हैं। कांग्रेस की पूनिया इस क्षेत्र से दो सौ किलोमीटर दूर सादुलपुर से विधायक हैं। राठौड़ के नामांकन में योग गुरु रामदेव की मौजूदगी से अब उन्हें यादव समाज का समर्थन मिलता दिख रहा है। रामदेव ने राठौड़ की जमकर तारीफ की और उन्हें सच्चा देशभक्त भी करार दिया। राठौड़ की शालीनता से स्थानीय जनता में उनकी गहरी पैठ भी है। राठौड़ ने युवाओं के लिए कई तरह की खेल प्रतियोगिताएं करवाई थीं, उससे युवा वर्ग का उनकी तरफ साफ झुकाव भी दिखाई दे रहा है। केंद्र में मंत्री होने के कारण राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के मुकाबले के लिए कांग्रेस ने उनकी कद की खिलाड़ी को ही मैदान में उतार मुकाबला बराबरी पर ला खड़ा किया।

भाजपा के राठौड़ के राजपूत समाज के मतदाताओं की संख्या बहुत कम है। उन्हें अन्य गैर जाट जातियों को बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है। राठौड़ का कहना है कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उनके सामने कौन उम्मीदवार है। जनता ने उनका पांच साल का काम देखा है। जनता फिर से एक बार नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहती है। राठौड़ का दावा है कि पूरे देश में राष्ट्रवाद की लहर है और जनता मोदी को समर्थन दे रही है। राठौड़ ने 2014 के चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉक्टर सीपी जोशी को तीन लाख से ज्यादा वोटों से हराया था।

इस सीट से 2009 में कांग्रेस के लालचंद कटारिया सांसद बन कर केंद्र में मंत्री भी बने थे। कटारिया मौजूदा में प्रदेश के कृषि मंत्री है। कटारिया ने ही इलाके में कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान संभाल रखी है। कटारिया का कहना है कि क्षेत्र की जनता इस बार बदलाव के मूड में है। कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा पूनिया को हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। ग्रामीण महिलाओं में तो उनके प्रति खासा आकर्षण है। कटारिया का कहना है कि पूरे पांच साल तक भाजपा शासन में इस क्षेत्र की जमकर उपेक्षा की गई। इस संसदीय क्षेत्र के जयपुर-दिल्ली हाइवे का काम भाजपा ने पांच साल में भी पूरा नहीं करवाया। इसके कारण क्षेत्र की जनता में गहरी नाराजगी है। जयपुर संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल है। प्रदेश में चार महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इस इलाके की आठ सीटों में से 6 सीटें कांग्रेस ने और 2 भाजपा ने जीतीं थी। क्षेत्र में कुल 19 लाख 52 हजार 542 मतदाता है। इनमें से 10 लाख 22 हजार 377 पुरुष और 9 लाख 30 हजार 160 महिला मतदाता है। प्रदेश में पहले चरण के चुनावों में हुई बंपर वोटिंग के कारण माना जा रहा है कि जयपुर ग्रामीण संसदीय क्षेत्र में भी भारी मतदान होगा।

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