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दिग्गजों को मात देकर 22 साल की उम्र में पार्षद बनीं रजनी, जानिए उनकी जीत सूबे में क्यों है अहम

अगले साल मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नगर निकायों के चुनावों में भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दलों की नजर है।

दिग्गजों को मात देकर 22 साल की उम्र में पार्षद बनीं रजनी, जानिए उनकी जीत सूबे में क्यों है अहम
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में मतगणना शुक्रवार को शुरू हुये। नतीजों में रायसेन जिले के देवरी नगर परिषद के वार्ड नंबर 4 से निर्दलीय प्रत्याशी 22 साल की रजनी बरकरे ने भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को पराजित कर सबसे कम उम्र की पार्षद बन गई हैं। हालांकि वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की हैं, लेकिन पार्षद बनने के बाद रजनी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की खूब तारीफ की।

वे बीएससी तक शिक्षा प्राप्त की है और सामाजिक विकास के प्रति काफी जागरूक हैं। उन्होंने जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि गांव के विकास के लिए वे अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगीा। वार्ड में सड़क, बिजली, पानी को उपलब्ध कराने और जरूरतमंदों को विधवा-वृद्धा पेंशन दिलाने की कोशिश करेंगी। इसके साथ ही वे गांव में सभी घरों में स्वच्छता का प्रतीक शौचालय बनवाने के लिए सरकार से फंड उपलब्ध करवाने का प्रयास करेंगी।

नगरीय निकायों में 25 पार्षद निर्विरोध चुन लिए गए हैं

राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के सचिव राकेश सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के 18 जिलों के 46 नगरीय निकायों में चुनाव के लिए 3,397 उम्मीदवार मैदान में थे। कहा कि इन नगरीय निकायों में 25 पार्षद निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि 814 पार्षदों के पदों पर चुनाव हुए है। इन 46 नगरीय निकायों में छह नवगठित नगर परिषद भी शामिल हैं। चुनाव के बाद शुक्रवार (30 सितंबर 2022) से मतगणना हो रही है। नगरीय निकाय चुनाव के लिए 27 सितंबर को वोट डाले गए थे। नगरीय निकायों में कुल 8.42 लाख मतदाता थे और 72 फीसदी मतदान हुआ था।

इस बीच उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अदालत ऐसी जगह नहीं जहां हर कोई ‘कुछ प्रचार’ पाने के लिए आ जाए। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही एक राजनीतिक दल की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें दावा किया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर चुनाव आयोग का नहीं, बल्कि कुछ कंपनियों का नियंत्रण होता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव प्रक्रिया की निगरानी निर्वाचन आयोग (ईसी) करता है और ईवीएम का इस्तेमाल दशकों से चुनावों में किया जा रहा है। इसलिए ऐसे आरोप सही नहीं हैं।

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First published on: 30-09-2022 at 08:52:00 pm
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