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पुलिस और जनता के बीच खाई को पाटना जरूरी: राजनाथ

तिरुवनंतपुरम में समुदायिक पुलिस पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस के लिए उनके और स्थानीय समुदायों के बीच मौजूद विश्वास की कमी को पाटना बहुत जरूरी है।
Author तिरुवनंतपुरम | January 27, 2016 23:31 pm
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को तिरुवनंतपुरम में सामुदायिक पुलिस पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने पुलिस को उसके और स्थानीय समुदाय के बीच मौजूदा ‘विश्वास की कमी’ को पाटने की नसीहत देते हुए कहा कि इससे देश में पुलिस की क्षमता को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। तिरुवनंतपुरम में समुदायिक पुलिस पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस के लिए उनके और स्थानीय समुदायों के बीच मौजूद विश्वास की कमी को पाटना बहुत जरूरी है। मेरा हमेशा से मानना है कि किसी भी पुलिस बल की क्षमता स्थानीय समुदाय के साथ उसके रिश्ते और जुड़ाव पर निर्भर करती है।

सामुदायिक पुलिस के लिए राष्ट्रव्यापी कार्य योजना पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि स्थानीय पुलिस थानों को स्थानीय समुदाय के साथ जोड़ने के लिए एक तकनीकी व्यवस्था की तत्काल जरूरत है। गृह मंत्री ने कहा कि ये पहल भविष्य में पुलिस बल के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के तौर पर हों और इस बारे में उन्होंने मंत्रालय की ओर से सकारात्मक कदम उठाए जाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पुलिस बल के लिए सामुदायिक पुलिस मार्गदर्शक सिद्धांत के तौर पर हों और निश्चित रूप से मैं यह कहना चाहूंगा कि संबंध कायम करना हमारा मुख्य ध्येय हो। मेरी यह दृढ़ सोच है कि सामुदायिक पुलिस को हमारी पुलिस व्यवस्था में संस्थागत किया जाना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि एक तरफ अपराध की विविधता और जटिलता बढ़ रही है तो दूसरी तरफ लोगों की उम्मीदों में इजाफा हो रहा है। इस वजह से पुलिस के सामने चुनौतियों भी अलग-अलग अंदाज में और बदलाव के साथ आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कानून और अन्य मुद्दों के अलावा आतंकवाद भी हमारे लिए गंभीर विषय बना हुआ है। वैश्विक आतंकवाद के अलावा इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए सामाजिक चुनौतियां पैदा हो रही हैं जिसने पुलिस के सामने बहुत चुनौतियां पेश की हैं।

सिंह ने कहा कि एक तरफ नए युग के अपराध और अपराधियों से निपटने में नई तकनीकों से कानून प्रवर्तन एजंसियां सक्षम बन रही हैं तो दूसरी तरफ इसने अपराधियों को भी ताकतवर बनाया है। उन्होंने कहा कि आज कोई भी दुनिया के किसी कोने में बैठ कर गुमनाम रहते हुए अपराध को अंजाम दे सकता है, जिसका पता भी नहीं चल सकेगा। इसलिए आज की प्रौद्योगिकी संचालित दुनिया में जो प्रश्न उभर कर सामने आया है वह यह कि सामुदायिक पुलिस की क्या भूमिका हो सकती है।

समारोह के दौरान उन्होंने समूचे राज्य में ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने के लिए पुलिस बल की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारी पुलिस बल की पेशेवर प्रतिबद्धता और बहादुरी की मैं सराहना करता हूं। लोग ऐसी पुलिस व्यवस्था चाहते हैं जो सामाजिक परिप्रेक्ष्य और स्थानीय माहौल में उत्तरदायी और जिम्मेदार हो। उन्होंने कहा कि आज भारत की जनता एक ‘स्मार्ट’, सक्षम और जनता के अनुकूल पुलिस चाहती है। केरल सरकार की सामुदायिक पुलिस की पहल और ‘जनमैत्री’ परियोजना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग के बगैर पुलिस के सामने आने वाले दुष्कर कार्यों को पूरा नहीं किया जा सकता।

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