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भारत-बांग्लादेश जलीय सीमा को मजबूत बनाएंगे : राजनाथ

सीमा की बाड़बंदी में धीमी प्रगति पर नाखुशी जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि केंद्र असम-बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय जलीय सीमा को सील करने के लिए दो पायलट परियोजनाओं के जरिए व्यवहार्यता अध्ययन कर रहा है..
Author धुबरी (असम) | January 4, 2016 23:43 pm
गुवाहाटी में प्रेंस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह।

सीमा की बाड़बंदी में धीमी प्रगति पर नाखुशी जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि केंद्र असम-बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय जलीय सीमा को सील करने के लिए दो पायलट परियोजनाओं के जरिए व्यवहार्यता अध्ययन कर रहा है।

राजनाथ सिंह ने सोमवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘इस बात को देखने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन किया जा रहा है कि जलीय रास्ते से घुसपैठ रोकने के लिए हमें क्या करना चाहिए। दो पायलट परियोजनाएं पहले ही चल रही हैं। हम उनके नतीजे को देखेंगे और अगर वो सफल रहते हैं तो कुछ स्थानों पर हम उन्हें अपनाएंगे।’ केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि सरकार व्यवहार्यता रिपोर्ट आने के बाद बांग्लादेश से घुसपैठ को रोकने के लिए कठोर कदम उठाना शुरू करेगी।

सिंह दो दिन की असम यात्रा पर हैं। उन्होंने करीमगंज और धुबरी जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा का निरीक्षण करने के बाद कहा कि वह फिलहाल चल रहे कार्य से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अधिकारियों ने मुझसे कहा है कि करीमगंज सीमा को दिसंबर 2016 तक सील कर दिया जाएगा जबकि धुबरी को 2017 तक सील कर दिया जाना अनुमानित है। हालांकि, व्यक्तिगत तौर पर मैं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं क्योंकि असम की बांग्लादेश के साथ तकरीबन 263 किलोमीटर लंबी सीमा है। कई स्थानों पर अंतराल है। हमें उन्हें भरने की जरूरत है।’

सिंह के साथ सीमा के निरीक्षण के दौरान आॅल असम स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधि भी थे। उन्होंने कहा कि केंद्र असम संधि के प्रावधानों को पूरा करने के लिए संगठन के साथ चर्चा का इच्छुक है। असम की बाढ़ की समस्या पर उन्होंने कहा, ‘यह असम की सबसे बड़ी समस्या है। मैं इस बात का पता लगाने के लिए राज्य सरकार से बातचीत करना चाहता हूं कि इस संबंध में क्या किया जा सकता है। हम उनसे सुझाव मांगते हैं। केंद्र और राज्य दोनों को समस्या का स्थायी समाधान ढूंढने के लिए बातचीत करने की जरूरत है।’ गृह मंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें आदिवासी क्षेत्र में जमीन के अतिक्रमण के बारे में सूचित किया गया है और उन्होंने उसे रोकने की जरूरत पर जोर दिया।

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