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जल स्रोत सूखे, शहर से लेकर गांव तक प्यासे

प्रदेश में पेयजल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार बैठकें हो रही हैं। हालात की समीक्षा की जा रही है। जलदाय मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि सरकार पेयजल संकट से निपटने के लिए कारगर तैयारी कर रही है।

Author June 12, 2019 5:58 AM
जल संकट की समस्या से लोगों का हाल बेहाल फोटो सोर्स- फाइनेंशिल एक्सप्रेस

राजीव जैन

राजस्थान में इन दिनों पीने के पानी का संकट गहरा गया है। गर्मी के बढ़ने और मानसून पूर्व वर्षा नहीं होने के कारण आम आदमी को पेयजल मुहैया कराना सरकार के लिए बड़ी मुसीबत हो गई है। दूरदराज के गांवों में जहां परंपरागत पानी के स्रोत सूख गए हैं वहीं शहरी इलाकों में भी लोगों को पेयजल के संकट से जूझना पड़ रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में तो पानी आपूर्ति में कटौती तक कर दी गई है। जयपुर, अजमेर, टोंक जैसे बड़े शहरों में पेयजल आपूर्ति करने वाले बीसलपुर बांध में इस बार पानी की कम आपूर्ति ने संकट खड़ा कर दिया है। दूसरी तरफ पिछले पांच साल में पेयजल परियोजनाओं में हुई देरी के कारण भी इस बार फिर ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की कमी होना तय है।

इस बार प्रदेश में मानसून की अच्छी वर्षा नहीं होने से ही बांधों में पानी की आवक नहीं हो पाई। व्यक्ति 275 लीटर पानी रोेजाना बचाने पर फोकस रखा है। इसमें रोजाना व्यर्थ बह रहे पानी को बचा कर लोगों को मुहैया कराने पर जोर है। जयपुर, अजमेर समेत कई शहरों में पानी की आपूर्ति करने वाले टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बांध में जल स्तर मौजूदा समय में बहुत नीचे पहुंच गया है। जलदाय विभाग का मानना है कि गरमी में इस बांध से बहुत कम पानी ही मिल रहा है। इसके कारण पेयजल आपूर्ति में कटौती की जा रही है। अप्रैल के बाद तो पानी बहुत ही कम मात्रा में लोगों तक पहुंच रहा है।

विभाग ने 15 से 20 मिनट की कटौती की है। लेकिन अघोषित तौर पर आधे घंटे से ज्यादा आपूर्ति में कटौती होने से लोगों में आने वाले समय का भय पनप गया है। जयपुर शहर में पानी का संकट इतना ज्यादा बढ़ गया है कि लोगों को निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी का कहना है कि जयपुर शहर में मांग के अनुपात में पानी की आपूर्ति की जा रही है। अब तक 521 टयूबवेल को खोदा जा चुका है। इनमें से 410 से पानी आपूर्ति को चालू किया जा चुका है। जयपुर में 732 टयूबवल को खोदने की इजाजत मिली हुई है। विभाग जल्द ही बाकी बचे टयूबवेल को खोद कर उनसे पानी आपूर्ति करने की तैयारी में है।

प्रदेश में पेयजल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार बैठकें हो रही हैं। हालात की समीक्षा की जा रही है। जलदाय मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि सरकार पेयजल संकट से निपटने के लिए कारगर तैयारी कर रही है। पेयजल से जुड़ी शिकायतों को लेकर हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों का फौरन निपटारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मार्च से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का बिल निशुल्क कर दिया गया है। वर्तमान में 4500 गांवों और 47 शहरों में जरूरत के हिसाब से टैंकरों के जरिये पेयजल परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए सभी जिला कलक्टरों को बजट का आबंटन कर दिया गया है।
दूसरी तरफ पानी आपूर्ति की परियोजनाओं में पिछले पांच साल सरकार ने कोई ध्यान ही नहीं दिया। इसके कारण इनमें अनावश्यक देरी हुई और अब खमियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण राज्य में 54 में से 37 बड़ी परियोजनाएं और 437 में 119 ग्रामीण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं।

राजस्थान में लोगों को पीने का साफ पानी दिलाने की मुहिम में लगे सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष बाफना का कहना है कि सरकार को सबसे ज्यादा ध्यान पेयजल की गुणवत्ता पर देना चाहिए। प्रदेश में आधी से ज्यादा आबादी अभी भी फ्लोराइड और अन्य रसायन-युक्त पानी ही पी रही है। इससे लोगों के स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण जनता गंदा पानी पीने से ही कई बीमारियों से ग्रसित हो रही है। बाफना का कहना है कि इस बार कम बारिश से भी पेयजल संकट होना तय है।

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