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राजस्‍थान चुनाव से पहले बीजेपी को लग सकता है बड़ा झटका, पार्टी छोड़ सकते हैं मानवेंद्र स‍िंंह

मानवेंद्र सिंह ने बाड़मेर के पचपदरा में आने वाले 22 सितंबर को रैली का आयोजन किया है। इस रैली को स्वाभिमान रैली का नाम दिया गया है। मानवेंद्र सिंह इस रैली में भाजपा में हाशिए पर ढकेल देने के बाद पार्टी से निकाल दिए गए अपने पिता के नाम पर भी संवेदनाओं को झकझोर सकते हैं।

भाजपा नेता मानवेंद्र सिंह। Express archive photo

साल 2019 के चुनावों से पहले राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव नजदीक आते ही राजनेताओं की गतिविधियों में भी इजाफा होने लगा है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि बीजेपी के संस्थापक सदस्य और बाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। अटकलें लग रही हैं कि वह कांग्रेस के साथ जा सकते हैं। मानवेंद्र​ सिंह बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट पर विधायक का चुनाव जीते थे।

मानवेंद्र सिंह ने बाड़मेर के पचपदरा में आने वाले 22 सितंबर को रैली का आयोजन किया है। इस रैली को स्वाभिमान रैली का नाम दिया गया है। मानवेंद्र सिंह को उम्मीद है कि इस रैली में बड़ी संख्या में राजपूत समुदाय के लोग शामिल हो सकते हैं। मानवेंद्र सिंह इस रैली में भाजपा में हाशिए पर ढकेल देने के बाद पार्टी से निकाल दिए गए अपने पिता के नाम पर भी संवेदनाओं को झकझोर सकते हैं।

समाचार चैनल आज तक के मुताबिक, मानवेंद्र सिंह ने रैली में अपनी ताकत दिखाने के लिए करीबी और समर्थकों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में भी वह लगातार लोगों से मिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मानवेंद्र सिंह ने कहा कि मुझे भविष्य की राजनीति कैसे करनी है, यह फैसला 22 सितंबर को पचपदरा में वाली स्वाभिमान रैली में होगा। इस रैली में वे सभी लोग मौजूद रहेंगे, जिन्होंने मेरे पिता के आखिरी चुनाव में साथ दिया था। इसमें मेरे सभी साथी भी मौजूद होंगे।

मानवेंद्र सिंह के पिता और भाजपा के संस्थापक रहे जसवंत सिंह और सीएम वसुंधरा राजे के बीच रिश्तों में आई दरार भी उनके मोहभंग का कारण है। साल 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने जसवंत सिंह का टिकट काट दिया था। उनकी जगह कर्नल सोनाराम चौधरी को​ बाड़मेर लोकसभा सीट से टिकट दिया गया था। सियासी हलकों में ये चर्चा तेजी से उठी थी कि जसवंत सिंह का टिकट कटने का कारण सीएम वसुंधरा राजे थीं। हालांकि बाद में जसवंत सिंह ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। इस चुनाव में मोदी लहर के बावजूद वह 4 लाख से ज्यादा वोट पाने में कामयाब रहे थे।

भाजपा नेतृत्व ने मानवेंद्र सिंह पर दबाव बनाया था कि वह इस चुनाव में अपने पिता के खिलाफ चुनाव प्रचार करें। लेकिन मानवेंद्र ने इससे साफ तौर पर इंकार कर दिया। चुनावों के बाद मानवेंद्र को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया गया। इसके बाद से मानवेंद्र लगातार पार्टी में हाशिए पर बने हुए हैं।

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