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राजस्थान: कारगिल में शहीद सिपाही की बहन ने मूर्ति को बांधी राखी, दिया भात भरने का न्यौता

सीकर जिले के गांव सिहोट छोटी में बहन ने अपनी बेटी का भात भरने के लिए शहीद भाई की मूर्ति को राखी बांधी और अपने यहां आने का न्यौता दिया। दरअसल गांव के रहने वाले गणपत सिंह ढाका सेना में सिपाही थे। वह कारगिल युद्ध के दौरान 27 जुलाई 1999 को शहीद हुए थे।

Author Updated: June 18, 2018 2:37 PM
शहीद भाई को राखी बांधती बहन। फोटो- विक्रम सोलंकी (स्‍थानीय निवासी)

राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र अपनी वीरता और शौर्य के लिए आदिकाल से ही प्रसिद्ध रहा है। यहां वीरगति पाना शोक नहीं उत्सव का मौका होता है। यहां वीरगति पाने वाले योद्धाओं को याद करने का अलग ही रिवाज हैं। इसी रिवाज की बानगी रविवार (17 जून) को सीकर जिले के गांव सिहोट छोटी में देखने को मिली। जब बहन ने अपनी बेटी का भात भरने के लिए शहीद भाई की मूर्ति को राखी बांधी और अपने यहां आने का न्यौता दिया। दरअसल सिहोट छोटी गांव के रहने वाले गणपत सिंह ढाका सेना में सिपाही थे। वह कारगिल युद्ध के दौरान 27 जुलाई 1999 को शहीद हुए थे। वह 16 ग्रेनेडियर्स में तैनात थे। उनकी शहादत के बाद गांव में उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई थी। शहीद गणपत सिंह की बहन भंवरी की बेटी प्रियंका की शादी होने वाली है। शादी के लिए 21 जून का दिन तय किया गया था। शादी से पहले भंवरी अपने भाइयों को भात का न्यौता देने के लिए आई थी।

भंवरी देवी गांव में आने के बाद सबसे पहले अपने छोटे भाई गणपत सिंह की मूर्ति के पास गईं। उन्होंने अपनी भाई की मूर्ति को राखी बांधकर मायरे में आने के लिए न्यौता दिया। इस दौरान वहां गणपत सिंह की वीर पत्नी मंजू देवी भी मौजूद थीं। भाई—बहन का ये प्रेम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। खुद मंजू देवी भी देर तक अपने भाई की मूर्ति को काफी देर तक देखती रहीं। बाद में भंवरी ने अपने दूसरे भाई सुरेन्द्र सिंह ढाका, महेश ढाका, भतीजे नरेन्द्र ढाका सहित परिवार के भाई भतीजों को तिलक करके भात का न्योता दिया।

शहीद वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष रामदेवाराम बिजारणियां ने बताया कि शहीद गणपत सिंह ढाका 27 जुलाई 1999 को शहीद हुए थे। वह 16 ग्रेनेडियर्स मे सेवारत थे। कारगिल युद्ध के दौरान चोटी पर कब्जे की कोशिश के दौरान उन्होंने वीरगति पाई थी। गांव के लोग हर साल उनके सम्मान में इस कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। इलाके के लोगों ने बताया कि इस दिन जिले के अमूमन हर स्कूल में उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और स्कूली बच्चे इस दिन प्रभात भेरी निकाल कर उनको याद करते हैं। गांव में किसी भी विशेष पर्व पर लोग शहीद की प्रतिमा को नमन करना नहीं भूलते हैं।

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