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गोवंश कानून भी असरदार नहीं, जारी है बेधड़क तस्करी

राजस्थान ऐसा पहला प्रदेश है जहां गायों की देखभाल के लिए सरकार ने अलग से गो पालन विभाग बनाया है। राजस्थान में गो तस्करी को रोकने के लिए कड़ा कानून होने के बावजूद गो तस्करी बेधड़क जारी है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (Express Photo)

राजस्थान ऐसा पहला प्रदेश है जहां गायों की देखभाल के लिए सरकार ने अलग से गो पालन विभाग बनाया है। राजस्थान में गो तस्करी को रोकने के लिए कड़ा कानून होने के बावजूद गो तस्करी बेधड़क जारी है। गो तस्करी रोकने के लिए सरकार ने अलग से विशेष पुलिस चौकियां भी बना रखी हैं। गो तस्करों की पुलिस से मुठभेड़ की घटनाएं अलवर और भरतपुर जिलों होती रहती हैं। अलवर जिले के बहरोड में इस साल अप्रैल में कथित गोरक्षकों ने गो तस्करी के शक में पहलु खां को पीट पीट कर मार डाला था। दूसरी तरफ सरकार ने गोवंश और गोशालाओं के विकास के लिए कई तरह के नवाचार भी किए हैं। सरकार ने पिछले साल से स्टांप डयूटी पर 10 फीसद सरचार्ज लगा कर, इस रकम को गोसंरक्षण के काम में लगाने का फैसला किया है। इसके तहत सरकार ने 151 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटा कर इसमें से 138 करोड़ से ज्यादा की रकम गायों की देखभाल और गोशालाओं पर खर्च भी कर दिए हैं।

प्रदेश में इन दिनों सिरोही, जालोर और पाली जिलों में बाढ़ का जो कहर है उसका सर्वाधिक असर गोशालाओं पर पड़ा है। इन जिलों में कई बड़ी गोशालाएं है और उनमें गायों की मौत से गोपालकों में बड़ी चिंता फैली हुई है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बाढ़ग्रस्त इलाकों के दौरे में गोशालाओं के लिए अतिरिक्त धन मुहैया कराने के भी निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि उसने इन जिलों की 21 करोड रुपए से ज्यादा की रकम जारी कर दी है। सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया कि इन जिलों की गोशालाओं को सरकार ने कोई धन नहीं दिया है। प्रदेश में 1995 में ही गोवध निषेध और गोसंवर्धन कानून बन गया था। इसमें गो तस्करी की रोकथाम के कड़े नियम हैं। अलवर और भरतपुर जिलों के मेव बहुल इलाकों में गायों की तस्करी की घटनाओं से ही कई बार बड़ा बवाल खड़ा हो जाता है।

इस साल एक अप्रैल को जयपुर के हटवाडे से गाय खरीद कर अपने गांव हरियाणा के नुहं मेवात के पहलु खां को बहरोड के पास गोरक्षकों ने घेर लिया था। गोरक्षकों ने पहलु खां की जमकर पिटाई कर दी थी और तीन अप्रैल को उसकी मौत से बड़ा बंवडर मच गया था। प्रदेश के गो पालन राज्य मंत्री ओटाराम देवासी का कहना है कि तस्करी और वध से बचाई गई गायों के लिए एक अलग से योजना बनाई गई। इसके तहत एफआईआर दर्ज होने संबंधित गोवंश के चारा पानी और पशु आहार के लिए 32 रुपए रोजाना और छोटे गोवंश के लिए 16 रुपए की राशि एक वर्ष तक के लिए गोशालाओं को दी जाती है। वर्ष 2015-16 में तस्करी और वध से बचाए चार हजार 449 गोवंश के पालन पोषण के लिए करीब दो करोड़ रुपए की सहायता दी गई। इसी तरह गत वर्ष 4 हजार 611 गोवंश को बचाया गया और उनके लिए सरकार ने डेढ करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की। बछड़ों के पंजीकरण और बीमा के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की सहायता राशि जारी की है। देवासी का कहना है कि गो पालन विभाग ने 726 गोशालाओं के प्रतिनिधियों को गोसेवा का प्रशिक्षण भी दिया है। इन प्रतिनिधियों को गोवंश की देख रेख के साथ ही टीकाकरण, बीमारियों से बचाव, संतुलित आहार, डेयरी प्रबंधन आदि का निशुल्क प्रशिक्षण दिया।

 

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