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फिर मुश्किल में वसुंधरा राजे सरकार, गुर्जर समाज चौथी बार करने जा रहा आंदोलन

राजस्थान में इस साल के आखिर तक विधान सभा चुनाव होने हैं। इसलिए गुर्जर समाज वसुंधरा राजे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

राजस्‍थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। फिर से गुर्जर समाज सरकार के खिलाफ आंदोलन करने जा रहा है। आज (06 मई को) गुर्जर समाज के लोगों ने गुर्जर आरक्षण आंदोलन का केंद्र रहे बयाना के कारबाड़ी गांव में फिर से बैठक की और 15 दिन बाद शुरू किए जाने वाले आरक्षण आंदोलन पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि गुर्जर नेताओं ने ओबासी आरक्षण विभाजन की मांग पर आंदोलन की रूप रेखा इस बैठक में तय की है और आगामी 21 मई से राज्यव्यापी आरक्षण आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। गुर्जरों का यह चौथा आंदोलन होगा। इससे पहले भी तीन बार ओबीसी आरक्षण की मांग पर आंदोलन हो चुका है। तीनों बार इसी गांव में गुर्जर नेताओं ने बैठकर रणनीति बनाई थी।

बता दें कि राज्य में चार बार सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण दिया है, इनमें से तीन बार कोर्ट ने उसे रद्द किया है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता, इसलिए गुर्जर समाज ओबीसी में ही अपने लिए आरक्षण की सीमा तय करने की मांग कर रहा है। इस आंदोलन में अब तक 72 लोगों की मौत भी हो चुकी है। कारबाड़ी गांव में ही साल 2008 में 18 लोग पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। यहां 23 मई को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया है। दौसा जिले के सिकंदरा में भी 20 लोगों की मौत आरक्षण आंदोलन में हुई थी, वहां 24 मई को श्रद्धांजलि सभा बुलाई गई है। इसके अलावा 29 और 30 मई को भी श्रद्धांजलि सभा बुलाई गई है, ताकि इसी बहाने गुर्जर समाज आंदोलित हो।

दरअसल, राजस्थान में इस साल के आखिर तक विधान सभा चुनाव होने हैं। इसलिए गुर्जर समाज वसुंधरा राजे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। गुर्जर समाज चाहता है कि ओबीसी आरक्षण में विभाजन हो। यूपी में इस दिशा में काम हो चुका है। केंद्र सरकार भी इस बाबत एक कमेटी बना चुकी है। सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार राजस्थान में ओबीसी आरक्षण में बंटवारा करना नहीं चाहती है। उधर, कई गुर्जर नेता विधान सभा चुनाव के मद्देनजर अपनी ताकत का इजहार कर चुनावी टिकट पाने की जुगत में लगे हैं। बता दें कि साल 2008 में लंबे आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने गुर्जरों को पांच फीसदी आरक्षण दिया था जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। बाद में साल 2011 में गहलोत सरकार ने ओबीसी कमीशन की सिफारिश पर गुर्जरों को एक फीसदी आरक्षण दिया था। इसे भी कोर्ट ने रोक दिया। साल 2015 में वसुंधरा सरकार ने पांच फीसदी आरक्षण का वादा किया मगर वो कानूनी उलझन में फंस कर रह गया।

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