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स्कूली बालिकाओं को बंटने वाली साइकिलों पर सियासी रंग

इसी तरह से भाजपा शासन में स्कूली विद्यार्थियों की पोशाक को भी बदला गया था। शासन बदलने के बाद अब कांग्रेस सरकार नए सिरे से विद्यार्थियों की पोशाक पुरानी वाली ही करने पर विचार कर रही है। इसके लिए एक समिति बना कर फैसला किया जाएगा।

Author June 19, 2019 5:23 AM
जब भाजपा की सरकार थी तो बालिकाओं को केसरिया रंग की साइकिलें दी गई थी।

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बालिकाओं को नि:शुल्क बंटने वाली साइकिलों का कैसा रंग हो, इस पर नए सिरे से सरकार ने फैसला किया है। प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थी तो बालिकाओं को केसरिया रंग की साइकिलें दी गई थी। सरकार बदलने के साथ ही अब इन साइकिलों का रंग भी बदलने वाला है। सरकार अब कक्षा 9 से 11 की प्रतिभाशाली बालिकाओं को भगवा के बजाए काले रंग की साइकिलें देगी। इसके चलते पहले से ही रखी केसरिया रंग की साइकिलों को काले रंग में रंगा जाएगा।

प्रदेश में सरकार बदलने के साथ ही सबसे ज्यादा बदलाव स्कूली शिक्षा में हो रहा है। इसमें स्कूलों के विद्यार्थियों के पाठयक्रम में कई तरह के बदलाव तो प्रमुख है। इनमें से ज्यादातर परिवर्तन इतिहास से जुडे मामलों को लेकर है। इसके साथ ही भाजपा शासन के दौरान प्रतिभा खोज परीक्षा का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया था। इसमें से अब उपाध्याय का नाम हटा दिया गया है। इसी तरह से पूर्व सरकार ने भाषा विभाग की तरफ से प्रदेश में महात्मा गांधी के नाम से चलने वाली सरकारी लाइब्रेरी का नाम भी बदल दिया था। इसमें भी दीनदयाल उपाध्याय का नाम रखा गया था। सरकार ने अब इन सरकारी लाइब्रेरी को फिर से महात्मा गांधी के नाम से संचालित करने का फैसला किया है।

इसी तरह से भाजपा शासन में स्कूली विद्यार्थियों की पोशाक को भी बदला गया था। शासन बदलने के बाद अब कांग्रेस सरकार नए सिरे से विद्यार्थियों की पोशाक पुरानी वाली ही करने पर विचार कर रही है। इसके लिए एक समिति बना कर फैसला किया जाएगा। ताजा विवाद का मामला स्कूली बालिकाओं को दी जाने वाली साइकिलों के रंग का है। साइकिल देने में रंग को लेकर कोई नियम नहीं होने से ही सरकारें अपने हिसाब से इसका फैसला करती है। पूर्व सरकार के समय 2 लाख 95 हजार 671 साइकिलों का वितरण बालिकाओं को किया गया था। अगले शिक्षा सत्र में भी ढाई लाख से ज्यादा प्रतिभाशाली छात्राओं को साइकिल देने का प्रावधान किया गया है।

प्रदेश के शिक्षाविद ऐसे मामलों को विवाद से जोड़ने पर आपत्ति जताते है। उनका कहना है कि सरकार को रंगों के बजाए शिक्षा की गुणवता सुधार पर जोर देना चाहिए। राजस्थान प्रगतिशील शिक्षक संघ के सचिव किशन लाल शर्मा का कहना है कि चाहें पूर्व सरकार हो या मौजूदा सरकार सभी अपनी सियासत के नजरिए से ही शिक्षा को ढालना चाहती है। प्रदेश में स्कूली शिक्षा की हालत पहले से ही बदतर है। महिला शिक्षा तो पिछले दस साल के स्तर पर ही है। स्कूलों में बालिकाओं के नामांकन बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है न कि ऐसे मामलों पर जिनसे शिक्षा प्रणाली पर कोई फर्क नहीं पड़ता हो। शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि पूर्व सरकार ने शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से आरएसएस के ढांचे में ढालने की कोशिश की थी।

उस दौरान स्कूली शिक्षा में किसी तरह कोई सुधार नहीं किया गया। इसी का नतीजा रहा कि महिला शिक्षा में कोई प्रगति नहीं हुई। स्कूली छात्राओं को दी जाने वाली साइकिलों का रंग अब केसरिया नहीं होगा। छात्राओं को पूर्व में भी काले रंग की साइकिलें ही दी जाती थी, इसलिए फिर से काले रंग की साइकिलें देने का फैसला किया गया है। डोटासरा का कहना है कि विद्यार्थियों की पोशाक के मामले में समिति का गठन किया गया है। उसके निर्णय पर ही यूनिफॉर्म में बदलाव किया जाएगा। पूर्व की सरकार सिर्फ एक ही उद्देश्य के तहत स्कूली बच्चों पर अपनी विचारधारा थोपने में लगी थी। मौजूदा सरकार बच्चों के बीच उनके पूर्ण विकास के मकसद से काम कर रही है।

दूसरी तरफ पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि मौजूदा सरकार निराधार काम कर रही है। उनके समय में स्कूली शिक्षा में कई अभिनव प्रयोग किए गए थे, जिसके चलते स्कूली विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर पर बढ़ोतरी हुई थी। विद्यार्थियों पर किसी तरह की कोई विचारधारा नहीं थोपी गई। देश के सभी क्रांतिकारी उसकी सरकार के लिए महान है। भाजपा सरकार के लिए महात्मा गांधी भी महान है तो दीनदयाल उपाध्याय भी महान है। उन्होंने प्रतिभा खोज परीक्षा से दीनदयाल उपाध्याय के नाम को हटाने को गलत करार दिया। उन्होंने शिक्षा राज्य मंत्री डोटासरा पर गलत तथ्यों के आधार पर बदलाव करने का आरोप भी लगाया।

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