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‘दिव्यांगों को मुख्य धारा में लाने में के लिए तकनीकी योगदान की जरूरत’

क्लिनिकल ट्रायल के तहत प्रोस्थेटिक्स सर्जन और फिजियोथेरेपिस्ट ने निर्धन और वंचित लोगों के लिए मायोइलेक्ट्रिक नियंत्रित कृत्रिम अंगों का निशुल्क निर्माण किया गया जिसके द्वारा उन दिव्यांगों को लाभ मिलेगा जिनके हाथ सही ढंग से काम नहीं कर पाते।

दिव्यांगों की मदद के लिए आगे आईं कई संस्थाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए दिव्यांग शब्द का इस्तेमाल करने की अपील की थी। यह एक अच्छी पहल थी लेकिन इसके बावजूद दिव्यांगों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए अभी कड़ी मशक्कत की दरकार है। 2011 जनगणना के मुताबिक, देश की 2.21 फीसदी आबादी दिव्यांग थी, जिसमें 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 60 फीसदी लोग शामिल हैं। इनमें से 63.66 फीसदी दिव्यांग बेरोजगार है और अपनी आजीविका के लिए मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

हर साल 3 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। इस दिन दिव्यांगों के लिए अलग-अलग योजनाएं और सुविधाएं देने के वादे किए जाते हैं । समाज में दिव्यांगों की बराबरी, विकास, अधिकारों आदि के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये, सामान्य नागरिकों की तरह ही उनकी सेहत पर भी ध्यान देने के लिये और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये ‘पूर्ण सहभागिता और समानता’ की थीम को इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के लिये निर्धारित किया गया है। इसी के मद्देनजर, देश की तमाम संस्थाएं दिव्यांगों के जीवन के तौर-तरीकों को और बेहतर बनाने के लिए सक्रियता से काम कर रही हैं क्योंकि दिव्यांग व्यक्तियों के लिये समाज में नियम और नियामकों को ठीक ढंग से लागू करने के लिये कुछ कारगर कदम उठाने की जरूरत है।

देशभर में इसके लिए कई सामाजिक संस्थाएं काम कर रही हैं। इन्हीं में एक नारायण सेवा संस्थान भी शामिल है। पिछले 35 वर्षों से राजस्थान में नारायण सेवा संस्थान दिव्यांगों को सशक्त बनाने और उनकी समानता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है। दिव्यांगों के लिए कौशल विकास में प्रशिक्षण देने के साथ उनके लिए ऐसे काम कर रहा है जिससे उनको समाज में सम्मान मिले। नारायण सेवा संस्थान दिव्यांगों को निशुल्क चिकित्सा से लेकर उनके रहने, खाने और रोजगार दिलाने का काम कर रहा है। पिछले आठ सालों में नारायण सेवा संस्थान ने 8,750 दिव्यांगों को कुशल बनाया गया है। 2,875 दिव्यांगों की करेक्टिव सर्जरी करने के बाद, उन्हें मोबाइल ठीक करने की ट्रेनिंग भी दी गई है जिससे खुद को कमजोर न समझें। इसी के साथ दिव्यांगों को कंप्यूटर और हार्डवेयर प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया जिसके द्वारा 2830 लोगों को स्किल डेवलप करने का मौका मिला।

नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा, दिव्यांगों को मुख्य धारा में लाने के लिए इस संगठन ने दिव्यांगों के लिए मायोइलेक्ट्रिक आर्टिफिशियल लिंब बनाने का फैसला किया है। इसमें क्लिनिकल ट्रायल के तहत प्रोस्थेटिक्स सर्जन और फिजियोथेरेपिस्ट ने निर्धन और वंचित लोगों के लिए मायोइलेक्ट्रिक नियंत्रित कृत्रिम अंगों का निशुल्क निर्माण किया गया जिसके द्वारा उन दिव्यांगों को लाभ मिलेगा जिनके हाथ सही ढंग से काम नहीं कर पाते। संस्थान में प्रतिदिन करीब 100 जरूरतमंदों के निशुल्क ऑपरेशन किए जा रहे हैं। ऑपरेशन के समय से लेकर व बाद में भर्ती रहने तक सभी प्रकार की दवाइयां और साथ में आए परिजनों को निशुल्क आवास और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाती है। सुगम्य भारत अभियान के तहत दिव्यांगों के उदारीकरण की सख्त जरूरत है।

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