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राजस्थान में लोकसेवकों को बचाने वाला बिल पेश, सड़क से सदन तक विपक्ष ने किया भारी विरोध प्रदर्शन

लोकसेवकों के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार की मंजूरी लेने के प्रावधान वाले विधेयक को कांग्रेस के साथ ही भाजपा के विधायक के तीखे तेवरों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।

Author जयपुर | October 24, 2017 8:14 AM
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान विधानसभा के सोमवार से शुरू हुए सत्र में विवादित विधेयक को लेकर भारी हंगामा हुआ। लोकसेवकों को बचाने वाले विवादित बिल को गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने पेश किया। इस दौरान प्रतिपक्षी विधायकों के साथ ही भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भी अपनी ही सरकार का विरोध करते हुए वाकआउट किया। इससे पहले कांग्रेस विधायक मुंह पर काली पटटी बांध और विधेयक के विरोध में नारे लिखी तख्तियां लेकर विधानसभा में पहुंचे।
राज्य विधानसभा का सत्र सोमवार को हंगामे के साथ शुरू हुआ। लोकसेवकों के खिलाफ केस दर्ज कराने से पहले सरकार की मंजूरी लेने के प्रावधान वाले विधेयक को कांग्रेस के साथ ही भाजपा के विधायक के तीखे तेवरों ने सरकार की परेशानी बढ़ा दी है।

कांग्रेस ने सोमवार को ही विधानसभा के बाहर इस विधेयक को काला कानून करार देते हुए बड़ा प्रदर्शन भी किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुआई में हुए प्रदर्शन में सरकार की मुखालफत की गई। पुलिस ने पायलट समेत कई नेताओं को हिरासत में भी लिया। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक दल के उपनेता रमेश मीणा ने प्रस्तावित विधेयक का विरोध करते हुए अपनी बात रखनी चाही पर अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। इसी दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भी विधेयक का विरोध किया पर अध्यक्ष ने उन्हें भी नहीं बोलने दिया। इस पर तिवाड़ी अपनी ही सरकार के खिलाफ वाकआउट कर गए। कांग्रेस विधायकों ने भी प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी की अगुआई में सदन से वाकआउट किया। इस दौरान ही गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने प्रस्तावित विधेयक को पेश कर दिया। कटारिया का कहना था कि विधेयक में खामियां है तो सदस्यों को उस पर बहस करनी चाहिए। इसे सरकार पूरी तरह से देखेगी।

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विधेयक को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए निर्दलीय विधायक माणिक चंद सुराणा ने बडेÞ ही तर्कपूर्ण तरीके से कहा कि यह इमरजंसी की तरह है। उनका कहना था कि सीआरपीसी में बदलाव नहीं किया जा सकता है। इसके लिए विधेयक पेश करने से पहले राष्ट्रपति की अनुमति लेना जरूरी है जो सरकार ने अभी तक नहीं ली है। सदन के बाहर प्रतिपक्ष के नेता डूडी ने इसे काला कानून करार दिया। भाजपा विधायक तिवाडी ने कहा कि यह एक तरह से इमरजंसी का ही रूप है। दूसरी तरफ सीआरपीसी में संशोधन से जुडे इस विधेयक को लेकर सोमवार को ही हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर हो गई। भाजपा विधायक दल की भी सोमवार को बैठक हुई। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूरी एकजुटता के साथ सरकार के कामकाज को सराहा गया। इसमें तय किया गया कि विधानसभा में प्रतिपक्ष के आरोपों का भाजपा विधायक पूरी मजबूती से जवाब देंगे।

 

 

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