only 15 days newborn son pay last rites of his brave martyr father in alwar district of Rajasthan - 28 साल के शहीद को 15 दिन के बेटे ने दी मुखाग्नि, अंतिम विदाई के लिए उमड़ा गांव - Jansatta
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28 साल के शहीद को 15 दिन के बेटे ने दी मुखाग्नि, अंतिम विदाई के लिए उमड़ा गांव

जम्मू के सांबा सेक्टर की चमलियाल पोस्ट पर देश की सरहद की हिफाजत करते हुए बुधवार (13 जून) की सुबह बीएसएफ के जवान हंसराज गुर्जर शहीद हो गए। ये शहीद हंसराज की ड्यूटी का आखिरी दिन था, इसके बाद उन्हें फ्लाइट से अपने घर के लिए निकलना था।

बीएसएफ जवान अमर शहीद हंसराज गुर्जर को मुखाग्नि देने वाला 15 दिन का बेटा। फोटो- आनंद कुमार (स्थानीय निवासी)

रमजान के पाक महीने में भारत के एकतरफा सीजफायर का फायदा पाकिस्तान लगातार उठाने की कोशिश कर रहा है। भारत को भी शांति की कीमत अपने जवानों की जिंदगी देकर चुकानी पड़ रही है। यही कारण है कि जम्मू के सांबा सेक्टर की चमलियाल पोस्ट पर देश की सरहद की हिफाजत करते हुए बुधवार (13 जून) की सुबह बीएसएफ के जवान हंसराज गुर्जर शहीद हो गए। ये शहीद हंसराज की ड्यूटी का आखिरी दिन था, इसके बाद उन्हें फ्लाइट से अपने घर के लिए निकलना था। उनके 15 दिन के बेटे का कुआं पूजन होने वाला था। गुरुवार (14 जून) को पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव के कर दिया गया।

बता दें कि शहीद हंसराज गुर्जर राजस्थान के अलवर जिले की बानसूर तहसील के हरसौरा इलाके के मुगलपुरा गांव के रहने वाले थे। देश पर अपनी जान कुर्बान कर देने वाले हंसराज गुर्जर की उम्र सिर्फ 28 वर्ष है। उनका जन्म 20 अगस्त 1990 को हुआ था। हंसराज गुर्जर जम्मू कश्मीर के रामगढ़ सेक्टर में 62 बटालियन बीएसएफ की डेल्टा कम्पनी में तैनात थे।

बीएसएफ जवान अमर शहीद हंसराज गुर्जर के शव पर सजे तिरंगे के साथ वीर पिता। फोटो- आनंद कुमार (स्थानीय निवासी)

कुआं पूजन के लिए आना था घर : शहीद हंसराज गुर्जर सिर्फ 15 दिन पहले पिता बने थे। उनके घर बेटा हुआ था। जिसके कुआं पूजन के लिए 15 दिन बाद का मुहुर्त निकाला गया था। हंसराज गुर्जर का छुट्टी का आवेदन भी अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया था। बुधवार (13 जून) की रात की फ्लाइट से वह घर आने वाले थे। लेकिन उसी दिन सुबह देश की सेवा के लिए दुश्मन से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गए। आने से पहले उन्होंने रात में पत्नी से बात की थी और अपने आने की खबर दी थी।

बीएसएफ जवान अमर शहीद हंसराज गुर्जर को अंतिम सलामी देते बीएसएफ के जवान। फोटो- आनंद कुमार (स्थानीय निवासी)

देश को कई शहीद दे चुका है अलवर : अलवर के कई जवान सीमा पर देश के लिए लड़ते हुए अपनी जान कुर्बान कर चुके हैं। कुछ माह पहले ही हिमस्खलन होने के कारण अलवर का जवान शहीद हो गया था। सीमा के साथ अबूझमाड़ के जंगलों में भी नक्सलियों से लोहा लेते हुए मुण्डावर क्षेत्र के सुन्दरवाड़ी गांव के लक्ष्मण सिंह भी शहीद हो गए थे। इन्हें नक्सलियों को मारने के बाद पदोन्नत किया गया था।

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