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सीएम अशोक गहलोत से खुश नहीं कई कांग्रेसी, दो धड़ों में बंट रही पार्टी, विद्रोह की आहट

अजय माकन के रीट्वीट के बाद गहलोत का भी बयान आया। उन्होंने कहा- कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी सोनिया जी से मिलकर मीडिया के सामने पिछले सप्ताह ही घोषणा कर दी थी कि वह कांग्रेस अध्यक्ष के हर फैसले को स्वीकार करेंगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पार्टी के प्रभारी अजय माकन। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

राजस्थान कांग्रेस में असंतोष की सुगबुगाहट लगातार जारी है। बाहर से पार्टी दावा करती है कि सब लोग एकजुट हैं, लेकिन एकजुटता में दरार को पार्टी नेता ही अपने बयानों से जाहिर करते रहते हैं। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच संबंध अच्छे नहीं है, यह सबको पता है। सचिन पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान प्रभारी अजय माकन ने एक ट्वीट को रीट्वीट करके सीएम अशोक गहलोत को गहरा झटका दिया है। इससे ऐसा लगता है कि सीएम से कई कांग्रेसी खुश नहीं है। पार्टी के दो धड़ों में बंटने और अंदर विद्रोह की आहट आ रही है।

ट्वीट वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर का है। इसको अजय माकन ने रीट्वीट किया। ट्वीट के मुताबिक “किसी भी राज्य में कोई क्षत्रप अपने दम पर नहीं जीतता है। गांधी नेहरू परिवार के नाम पर ही गरीब, कमजोर वर्ग, आम आदमी का वोट मिलता है। मगर चाहे वह अमरिन्द्र सिंह हों या गहलोत या पहले शीला या कोई और! मुख्यमंत्री बनते ही यह समझ लेते हैं कि उनकी वजह से ही पार्टी जीती।”

इसी ट्वीट में सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का मुखिया बनाने को सही ठहराया गया। इसमें लिखा था “20 साल से ज्यादा अध्यक्ष रहीं सोनिया ने कभी अपना महत्व नहीं जताया। नतीजा यह हुआ कि वे वोट लाती थीं और कांग्रेसी अपना चमत्कार समझकर गैर जवाबदेही से काम करते थे। हार जाते थे तो दोष राहुल पर, जीत का सेहरा खुद के माथे! सिद्धु को बनाकर नेतृत्व ने सही किया। ताकत बताना जरूरी था।”

अजय माकन के रीट्वीट के बाद गहलोत का भी बयान आया। गहलोत ने कहा- कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी से मिलकर मीडिया के सामने पिछले सप्ताह ही घोषणा कर दी थी कि वह कांग्रेस अध्यक्ष के हर फैसले को स्वीकार करेंगे। गहलोत के अनुसार, कांग्रेस की परम्परा रही है कि हर निर्णय से पहले सभी से राय-मशविरा होता है तथा सभी को अपनी बात रखने का मौका मिलता है। सबकी राय को ध्यान में रखकर जब एक बार पार्टी आलाकमान फैसला ले लेता है, तब कांग्रेस के सभी सदस्य एकजुट होकर उसे स्वीकार करने की परम्परा को निभाते हैं। यही कांग्रेस की आज भी सबसे बड़ी ताकत है।

गहलोत ने सिद्धू को बधाई व शुभकामनाएं भी दी थीं। उन्होंने ट्वीट किया, “कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया जी ने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी है। सिद्धू को बधाई व शुभकामनाएं। उम्मीद है कि वह कांग्रेस पार्टी की परम्परा का निर्वहन भी करेंगे तथा सभी को साथ लेकर पार्टी की रीति-नीति को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगे।”

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