ताज़ा खबर
 

राजस्‍थान: मानवेंद्र स‍िंह ने द‍िए कांग्रेस में जाने के संकेत, बोले- सांसद बनना चाहता हूं, भाजपा ने जबरन व‍िधायक बना द‍िया था

मानवेंद्र ने कहा,'' ये आसान फैसला नहीं था लेकिन हालातों ने मजबूर कर दिया। मेरे स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की दत्तक पुत्री से और आडवाणी के बेटे और बेटियों से घर जैसे रिश्ते हैं। इसी माहौल में हम सभी बड़े हुए हैं। परिवार को छोड़ने का फैसला लेना आसान नहीं होता है।''

Author September 24, 2018 9:24 PM
भाजपा नेता मानवेंद्र सिंह। Express archive photo

भाजपा के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने शनिवार (22 सितंबर) को ऐलान किया था कि वह आत्मसम्मान के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। उनका आरोप था कि राज्य सरकार उनके समर्थकों का क​थित तौर पर उत्पीड़न कर रही है। मानवेंद्र ने कहा कि उनके पिता को साल 2014 में लोकसभा का टिकट देने से इंकार कर दिया गया, जबकि वह पार्टी की शुरूआत से ही उसके साथ थे। मानवेंद्र, साल 2013 में राजस्थान की बाड़मेर जिले की शेओ विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे। मानवेंद्र ने पार्टी छोड़ने के फैसले के बारे में द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की।

मानवेंद्र ने कहा,” ये आसान फैसला नहीं था लेकिन हालातों ने मजबूर कर दिया। मेरे स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की दत्तक पुत्री से और आडवाणी के बेटे और बेटियों से घर जैसे रिश्ते हैं। इसी माहौल में हम सभी बड़े हुए हैं। परिवार को छोड़ने का फैसला लेना आसान नहीं होता है।”

मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस में जाने की संभावनाओं पर कहा, ” मैं विचार के लिए आजाद हूं, लेकि जैसा मैंने पहले ही कहा था, ये मेरा फैसला नहीं है। ये लोगों का फैसला है। बाड़मेर के पचपदरा में आयोजित की गई स्वाभिमान रैली (जहां मानवेंद्र ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था) को पूरी तरह से लोगों ने नियंत्रित किया। लोगों ने ही पैसे जमा किए और लोगों ने ही मेरा मार्गदर्शन किया। जहां तक सवाल कांग्रेस में जाने का है, चूंकि ये भावना लोगों में कई सालों में विकसित हुई है और ये राजस्थान की जमीनी हकीकत भी है। इसलिए सभी लोग अपनी समझ के मुताबिक बातें कर रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ रिश्तों के सवाल पर मानवेंद्र ने कहा, ” जब सचिन के संसद में था इसलिए हमारा रिश्ता काफी पुराना है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कड़ी मेहनत की है, जिसे नकारा नहीं जा सकता है। और अशोक जी राजस्थान की राजनीति में किसी भी चारदीवारी और क्षेत्रीय सीमाओं से परे हैं। उनका अपना एक कद है। 2013 के विधानसभा चुनाव हारने का उनके प्रभाव पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरी पसंद हमेशा से ही लोकसभा थी। मैं कभी भी विधायक बनना नहीं चाहता था। मुझे इसके लिए बाध्य किया गया था। वहीं पत्नी चित्रा सिंह के चुनाव लड़ने की संभावनाओं के बारे में उन्होंने कहा कि मैं इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता। अभी परिवार में ऐसी कोई योजना नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App