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राजस्‍थान: चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा फायदा, पूर्व मंत्री किरोड़ीलाल मीणा वापस लौटे

66 साल के मीणा पेशे से डॉक्टर भी रहे हैं। राज्य के दौसा में इनका अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है।

साल 2008 में किरोड़ीलाल मीणा ने वसुंधरा सरकार और बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था।

राजस्थान चुनावों से पहले बीजेपी को बड़ा फायदा हुआ है। दस साल पहले बीजेपी छोड़ कर जाने वाले पूर्व मंत्री किरोड़ीलाल मीणा आज (11 मार्च को) फिर से बीजेपी में वापस लौट आए। जयपुर में बीजेपी मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने उनका पार्टी में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा कई मंत्री भी मौजूद थे। इससे पहले मीणा अपनी विधायक पत्नी गोलमा देवी के साथ बीजेपी राज्य मुख्यालय पहुंचे थे। उनके साथ विधायक गीता देवी भी थीं। इस मौके पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि दशक बाद विचारधारा में विचारधारा शामिल हो रही है। बता दें कि किरोड़ीलाल मीणा के राजनीतिक रिश्ते सीएम वसुंधरा राजे के साथ अच्छे नहीं रहे हैं। साल 2008 में दोनों के बीच रिश्तों में आई खटास के बाद किरोड़ीलाल मीणा ने वसुंधरा सरकार से इस्तीफा दे दिया था।

66 साल के मीणा पेशे से डॉक्टर भी रहे हैं। राज्य के दौसा में इनका अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। साल 2013 में उन्होंने पूर्व लोकसभा स्पीकर पी ए संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी ज्वाइन कर ली थी। मीणा राजस्थान एनपीपी के अध्यक्ष थे। उन्होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया है। मीणा दौसा के लालसोत सीट से नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के विधायक हैं। उनकी पत्नी गोलमा देवी समेत एनपीपी के चुल चार विधायक हैं। गोलमा जहां लक्ष्मणगढ़ से तो गीता वर्मा सिकरी से और नवीन पिलानिया अम्बर से विधायक हैं। हालांकि, चार में से तीन विधायक ही बीजेपी में शामिल हुए हैं। चौथे विधायक नवीन पिलानिया ने बीजेपी में जाने से इनकार कर दिया है।

2008 में जब किरोड़ीलाल मीणा ने बीजेपी छोड़ी थी तब उन्होंने राजस्थान विधानसभा चुनाव निर्दलीय तौर पर जीता था। उनकी पत्नी गोलमा देवी भी निर्दलीय चुनाव जीतकर राज्य की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री बनी थीं लेकिन 2013 के विधान सभा चुनाव से पहले इन्होंने एनपीपी ज्वाइन कर लिया था। बीच में साल 2009 में किरोड़ीलाल मीणा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर सांसद भी रह चुके हैं। दौसा के मीणा समुदाय में उनकी बड़ी पैठ मानी जीती है। बता दें कि राजस्थान की 200 विधान सभा सीटों में से दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान की 40 से ज्यादा सीटों पर मीणा समुदाय का प्रभाव गहरा है।

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