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राजस्थान: सरकार की अनदेखी के कारण डायन प्रताड़ना के मामले नहीं थम रहे

ऐसी घटनाओं को लेकर महिला और मानवाधिकार संगठनों ने समय-समय पर अपनी आवाज बुलंद कर प्रदेश में इस कुप्रथा की रोकने के लिए डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम-2015 बनाने के लिए सरकार को मजबूर कर दिया।

Author जयपुर | November 23, 2017 06:07 am
प्रतिकात्मक चित्र।

राजस्थान में महिलाओं को डायन बता कर प्रताड़ित करने की कुप्रथा पर सरकार लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है।प्रदेश में अंधविश्वास और अशिक्षा के कारण दो साल में करीब 170 से ज्यादा महिलाओं को डायन बता कर उन्हें प्रताड़ित करने के मामले पुलिस तक पहुंचे पर इनमें से ज्यादातर में सिर्फ कागजी खानापूरी ही हुई। प्रदेश में सरकार ने दो साल पहले ही डायन प्रताड़ना निवारण कानून भी बनाया पर सख्ती के अभाव में अभी भी ग्रामीण इलाकों में कई बार महिलाओं को प्रताड़ित करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास की गहरी जड़ें होने के कारण ही महिलाओं को डायन, भूतनी, प्रेत आदि बता कर उन्हें प्रताड़ित किए जाने का सिलसिला नहीं थम रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दो दशक में इन घटनाओं में बढ़ोतरी ही हुई है, जबकि इस दौरान शिक्षा का भी व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ है। ऐसी घटनाओं को लेकर महिला और मानवाधिकार संगठनों ने समय-समय पर अपनी आवाज बुलंद कर प्रदेश में इस कुप्रथा की रोकने के लिए डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम-2015 बनाने के लिए सरकार को मजबूर कर दिया। कानून बनने के बाद महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ कठोर सजा के प्रावधान रखे गए।

पुलिस तक पहुंचने वालों मामलों में सही अनुसंधान और गवाहों के अभाव में इनमें अभी तक कोई कठोर कार्रवाई भी सामने नहीं आई है। डायन प्रताड़ना के तहत मामलों में दर्ज आंकड़ों पर निगाह डालने पर साफ होता है कि पुलिस ने इस तरह के मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पुलिस के अनुसार डायन प्रताड़ना निवारण कानून लागू होने के बाद सितंबर 2017 तक प्रदेश में 127 मामले इस कानून के तहत दर्ज हुए हैं। इनमें से सिर्फ 73 में ही चालान पेश किया गया।  प्रदेश की बाल एवं महिला चेतना समिति का कहना है कि पुलिस में दर्ज मामलों से कहीं ज्यादा घटनाएं डायन कुप्रथा के तहत घटित हो रही हैं। पुलिस ज्यादातर मामले तो दर्ज ही नहीं करती है। समिति का कहना है कि हमारी लंबी लड़ाई के बाद प्रदेश में डायन प्रथा के खिलाफ कानून बना है। महिला जागरूकता को लेकर काम करने वाली स्वयंसेवी संस्था खवालिस की अध्यक्ष दीपा माथुर का कहना है कि साक्षरता के जरिये ही इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। राष्ट्रीय नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित दीपा माथुर का कहना है कि बालिकाओं को जागरूक कर ही डायन जैसी कुप्रथा को रोका जा सकता है। कानून तो बन गया पर इसका क्रियान्वयन बेहद लचर है।

दूसरी तरफ महिला व बाल विकास मंत्री अनिता भदेल का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ही प्रदेश के 18 जिलों में डायन कुप्रथा के विरोध में क ार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इस मामले में हमारी सरकार ने सख्त कानून बनाया है। दुर्भाग्य है कि सख्त कानून के बावजूद मामले सामने आ रहे है। प्रदेश के जिस इलाके में भी साक्षरता की कमी और झाड़फंूक व अंधविश्वास ज्यादा है, वहां इस तरह के मामले ज्यादा सामने आ रहे हंै।

 

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