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जयपुर: मंदिरों के बाहर लगे ‘नोट नहीं लेने’ के बोर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बडे़ नोट बंद किए जाने की घोषणा के साथ ही राजस्थान में भी लोगों में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

Author जयपुर | November 10, 2016 4:39 AM
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देश भर में 500 और एक हजार के नोट बंद किए जाने के बाद प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर दानदाताओं से कहीं रकम ली जा रही है तो कहीं नहीं ली जा रही है। छोटी काशी के तौर पर पहचान रखने वाले जयपुर शहर के कई बडे़ मंदिरों में नोट नहीं लिए जाने के नोटिस बोर्ड लगा दिए गए हैं। अजमेर में सूफी संत की गरीब नवाज की दरगाह में शर्तों के साथ दानदाताओं से बंद किए गए नोट लिएजा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बडे़ नोट बंद किए जाने की घोषणा के साथ ही राजस्थान में भी लोगों में अफरा तफरी का माहौल बन गया।

राजधानी जयपुर में बुधवार को कारोबारी गतिविधियां ठप होनेके साथ ही सरकारी दफ्तरों में इसी मसले पर चर्चा के दौर चलते रहे। पिंक सिटी में सबसे ज्यादा परेशानी पर्यटकों को उठानी पड़ रही है। देशी और विदेशी पर्यटकों को पुराने नोटों के साथ कई जगहों पर स्थानीय लोगों से उलझते देखा गया। रेलवे और बस स्टैंडों पर भी कर्मचारी 500 और एक हजार रुपए के नोट लेने में आनाकानीकरते रहे। जयपुर जिला प्रशासन ने सरकारी काउंटरों पर नोट के बदले टिकट और पर्यटकों को असुुविधा से बचाने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया। इसके बावजूद पर्यटकों को भारी परेशानी कासामना करना पड़ा। राज्य भर के ज्यादातर लोगों ने सरकार के नोट बंद करने की घोषणा को अच्छा कदम करार दिया। फुटकर कारोबार से जुडे़ लोगों के लिए बुधवार का दिन परेशानी भरा रहा।जयपुर के मंदिरों में भी दानदाताओं के लिए सूचनाओं से भरे नोटिस बोर्ड लगाए गए। शहर के सबसे प्रमुख मंदिर गोविंददेव के साथ ही अन्य मंदिरों में तो बाकायदा नोटिस बोर्ड लगाए गए।

500 और 1000 रुपए के नोट बंद- मोदी सरकार के फैसले पर क्‍या सोचती है जनता

इसमें श्रद्वालुओं से निवेदन किया गया कि कृपया भगवान को 500 और एक हजार रुपए के नोट का चढ़ावा न चढ़ाए। इससे दानदाताओं में असमंजस की स्थिति बन गई। श्रीगोविंददेव मंदिर के प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि दानपात्र में भेंट चढ़ाना या न चढ़ाना भक्तों की श्रद्वा पर निर्भर करता है। मंदिर प्रशासन ने तो केवल नोटों के चलन पर रोक की सूचना सरकारके निर्देशों के पालन के तहत लोगों की सुविधा के लिए लगाई है। श्रद्वालुओं का कहना है कि छोटे नोटों की उपलब्धता कम होने के कारण चढ़ावा कम चढ़ाया जा रहा है।अजमेर की गरीब नवाज दरगाह में श्रद्वालुओं से बंद किए गए नोट लिए जाने की विशेष व्यवस्था की गई है। दरगाह के नाजिम कार्यालय ने दान देने वालों के नाम पते दर्ज कर बंद किए गए नोट लेनेका फैसला किया है। नोटों के नंबर भी रजिस्टर में दर्ज कर दानदाता की पूरी पहचान ली जा रही है। दरगाह नाजिम कर्नल मंसूर अली खान ने इस संबंध में दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। दरगाह मेंलिए जा रहे नोटों के नकली होने पर उसे देने वाले को पकड़ने में आसानी रहे, इस मकसद से तमाम ब्योरा रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है।
दरगाह की लंगर देग में भी जायरिन बडे नोट डाल रहे हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय के अधीन काम करने वाली दरगाह की नाजिम कमेटी दानदाताओं की रकम की रसीद भी उन्हें सौंपरही है।

 

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