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राजस्थान में बाल संरक्षण पर छह माह का पाठ्यक्रम शुरू

अनेक बार बच्चे ढाबों पर बर्तन धोने, खाना परोसने, भीख मांगने व घर पर नौकर का काम कराते हुए मिलते हैं।

Author जयपुर | September 22, 2016 4:52 AM
मजदूरी करता एक बालक।

राजस्थान के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री डॉ अरुण चतुर्वेदी ने बुधवार को यहां कहा कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए समाज को संवदेशील होना होगा। बाल संरक्षण पर सर्टिफिकेट कोर्स के शुभारंभ के मौके पर चतुर्वेदी ने कहा कि पर्याप्त कानून होने के बावजूद जागरूकता व संवेदनशीलता के अभाव में बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है। अत: बच्चों के अधिकारों के संरक्षण व उनके समूचित शारीरिक, मानसिक विकास के साथ-साथ उन्हें श्रेष्ठ नागरिक बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों को संवेदनशील होकर कार्य करना होगा।  डॉ चतुर्वेदी बुधवार को सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा व आपराधिक न्याय विश्वविद्यालय, जोधपुर के बाल संरक्षण केंद्र, जयपुर व यूनिसेफ के सहयोग से संचालित किए जाने वाले ‘बाल संरक्षण पर सर्टिफिकेट कोर्स’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल सुधार आयोग बने हुए हैं। लेकिन कानूनों की जानकारी व जन जागरूकता के अभाव में उनके पास बच्चों के शोषण के मामले कम आते हैं। अनेक बार बच्चे ढाबों पर बर्तन धोने, खाना परोसने, भीख मांगने व घर पर नौकर का काम कराते हुए मिलते हैं। इसके बावजूद आम जन बालकों के अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की अनदेखी करते हुए नजर आते हैं।


महिला व बाल विकास मंत्री अनिता भदेल ने कहा कि बाल संरक्षण वास्ते कानून बने हुए हैं लेकिन इनकी पालना सुनिश्चित कराने में पुलिस अधिकारियों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, मानव तस्कर विरोधी शाखाओं व स्वयंसेवी संगठनों के साथ-साथ आमजन की भी महती भूमिका है। भदेल ने कहा कि पुलिस विश्वविद्यालय द्वारा बाल संरक्षण हेतु पाठ्यक्रम शुरू किया गया। यह देश का पहला पाठ्यक्रम है जिसकी बहुत उपयोगिता है। इस कोर्स को करने वालों को इसका लाभ मिले, इसलिए इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से भी मान्यता दिलाने की आवश्यकता है। बाल सुधार आयोग की अध्यक्षा मनन चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा बाल संरक्षण पर शुरू किए गए कोर्स को करने वाले अधिकारियों का क्षमता संवर्द्घन होगा व उनकी विषेषज्ञता बढ़ेगी व विभिन्न एजंसियों में आपसी तालमेल बढ़ेगा। साथ ही अधिकारी और अधिक संवेदनशील होंगे व फील्ड में जाकर बालकों के जीवन की क्या स्थिति है उससे रूबरू होकर उनके अधिकारों का संरक्षण बेहतर ढंग से कर सकेंगे।

यूनिसेफ की राजस्थान यूनिट के मुख्य कार्यकारी सेम्यूलसन ने कहा कि बच्चों के जीवन की सुरक्षा व खुशहाली हमारी पहली प्राथमिकता होनी