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जयपुर: राजमहल पैलेस होटल मामले में किरकिरी के बाद सरकार और पार्टी में खामोशी

पैलेस की वारिस पूर्व राजघराने की बेटी और भाजपा विधायक दीया कुमारी हैं।

Author जयपुर | September 13, 2016 05:51 am
जयपुर पूर्व राजघराने की सदस्य भाजपा विधायक दीया कुमारी ।

जयपुर के पूर्व राजघराने के राजमहल पैलेस होटल में किरकिरी होने के बाद सरकार और भाजपा में खामोशी छा गई है। इस मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) की तोड़फोड़ और सील की कार्रवाई के बाद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दखल ने ही सरकार और संगठन को खामोश रहने पर मजबूर कर दिया है। इस पैलेस की वारिस पूर्व राजघराने की बेटी और भाजपा विधायक दीया कुमारी हैं। उनसे ही प्राधिकरण आयुक्त शिखर अग्रवाल का मौके पर ही तगड़ा पंगा हुआ था। इसके बाद ही राजपूत समाज सड़कों पर आ गया था जिसने पार्टी को हिला दिया था। राज्य की राजनीति में पिछले महीने गरम माहौल पैदा करने वाले राजमहल मामले में अब सभी पक्षों ने चुप्पी साध ली है। प्राधिकरण और सरकार ने राजमहल में ताला जड़ने को कानूनी और प्रशासनिक तौर पर सही ठहराया था। इस मामले में प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री राजपाल सिंह शेखावत ने भी प्राधिकरण आयुक्त की कार्रवाई को जायज ठहराते हुए ताला खोलने की राजपूत समाज की मांग को सिरे से ठुकरा दिया था।

इसके बाद जब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दूत बन कर यहां आए राष्ट्रीय संगठन मंत्री सौदान सिंह ने आलाकमान का संदेश दिया तो हालात बदल गए। नगरीय विकास मंत्री शेखावत की अध्यक्षता वाली कमेटी ने ही रातों-रात फैसला कर दिया कि ताला अस्थायी तौर पर खोल दिया जाए। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस मामले में पूरी तरह से पार्टी आलाकमान और आरएसएस का दबाव था। भाजपा विधायक दीया कुमारी लगातार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के संपर्क में रही। शाह ने संगठन मंत्री सौदान सिंह को दो-टूक कह दिया था कि मामला हर हालत में फौरन सुलझना चाहिए।राजमहल मामले में अब जिला और सत्र अदालत का फैसला भी पूर्व राजपरिवार के पक्ष और प्राधिकरण के खिलाफ आ गया है। हालांकि प्राधिकरण इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में जाने की तैयारी में है। राजमहल प्रकरण में प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं से अलग पूरी तरह से सियासी चालें भी खूब चली गर्इं। इस प्रकरण के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विदेश में थीं। उनके आने के बाद राजपूत संगठनों ने जयपुर में बड़ी रैली निकाल कर अपनी ताकत भी दिखाई थी। इन संगठनों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को साफ चेतावनी दी थी कि इस मामले को उत्तर प्रदेश में भी उठाया जाएगा। इससे ही भाजपा में खलबली मच गई। उत्तर प्रदेश में भाजपा किसी भी तरह का नुकसान मोल लेने की स्थिति में नहीं है और राजस्थान के सबसे गरम मामले का फौरन ही सियासी हल निकल गया।

राजमहल प्रकरण सुलट जाने के बाद अब इस मामले में सरकार और प्रदेश भाजपा की तरफ से कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं है। राष्ट्रीय संगठन मंत्री सौदान सिंह ने यहां प्रदेश भाजपा मुख्यालय में ही बैठ कर मामला सुलझाया था। इसी जगह पर भाजपा विधायक दीया कुमारी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सौदान सिंह से अलग-अलग मुलाकातें कर अपनी बातें रखी थीं। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी भी लगातार मौजूद रहे। परनामी तो सिर्फ इतना कहते रहे कि सिर्फ संगठनात्मक मामलों पर ही सौदान सिंह से बात हो रही है। प्रदेश भाजपा के निचले स्तर के नेताओं के बीच भी राजमहल प्रकरण को लेकर कई किस्से चल रहे हैं।

 

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