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जमीन विवाद में सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरा जयपुर का पूर्व राजपरिवार

जयपुर विकास प्राधिकरण के राजमहल पैलेस होटल की बड़ी जमीन को कब्जे में लेने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है।

Author जयपुर | September 2, 2016 4:03 AM
जयपुर राजघराने की महारानी पद्मनी देवी

जयपुर विकास प्राधिकरण के राजमहल पैलेस होटल की बड़ी जमीन को कब्जे में लेने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में सरकार की कार्रवाई के विरोध में पूर्व राजपरिवार के साथ गुरुवार को हजारों लोगों ने शहर में रैली निकाली। इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व राजपरिवार की बेटी और भाजपा विधायक दीया कुमारी नहीं आई। दीया कुमारी से प्राधिकरण के आयुक्त शिखर अग्रवाल ने कब्जे के दौरान बुरा बर्ताव किया था। इसलिए राजपूत समाज सरकार से खासा नाराज है।

जयपुर में गुरुवार को भाजपा सरकार के खिलाफ राजपूतों में खासी नाराजगी देखने को मिली। सरकार के खिलाफ हुई इस रैली की अगुआई दीया कुमारी की माता पद्मनी देवी ने की। उनका साफ कहना था कि सरकार ने उनकी बेटी भाजपा विधायक दीया कुमारी का अपमान किया है। उन्होंने लोगों से अपील की की इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो। यह उनकी लड़ाई नहीं बल्कि आम जनता की है। सरकार ने आज उनके साथ ऐसा बर्ताव किया है, कल किसी के साथ भी ऐसा किया जा सकता है। विरोध प्रदर्शन के लिए गुरुवार सवेरे से ही बड़ी संख्या में लोग सिटी पैलेस और त्रिपोलिया गेट में जमा हो गए थे। इसके बाद पूर्व महारानी पद्मनी देवी ने रैली की अगुआई की और जुलूस राजमहल पैलेस होटल तक गया। रैली में राजपरिवार के साथ ही राजपूत और अन्य संगठन शामिल हुए। राजमहल पैलेस की जमीन को जिस तरीके से जेडीए ने कब्जे में लिया है, उसे ही पूर्व राजपरिवार ने अपना अपमान माना है। इस मामले में पूर्व राजपरिवार पूरी तरह से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ हो गया है।
जयपुर विकास प्राधिकरण ने 24 अगस्त को बेशकीमती जमीन को विवादित करार देकर अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद से ही पूर्व राजपरिवार की भाजपा विधायक दीया कुमारी और सरकार आमने-सामने हो गए हैं। दीया कुमारी ने इस मामले में मौके पर प्राधिकरण के आयुक्त के सामने भारी विरोध भी जताया। आयुक्त ने होटल के मुख्य दरवाजे तक सील कर दिए। इसके साथ ही पैलेस की कई बिल्डिंगों में तोड़फोड़ भी की गई। जमीन पर जेडीए के कब्जे के बोर्ड लगा दिए गए हैं। इस जमीन की बाजार कीमत करीब 500 करोड़ रुपए है। पूर्व राजपरिवार का कहना है कि जेडीए ने उन्हें नीचा दिखाने का काम किया है।

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रैली में शामिल संगठनों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे पहली तो जयपुर विकास प्राधिकरण के आयुक्त शिखर अग्रवाल को बर्खास्त करने की है। दूसरी राजमहल पैलेस का मुख्य दरवाजा खोला जाए। तीसरी मांग जो पूर्व राजपरिवार ने रखी है, वो है कि सारे जमीनी विवाद आपसी समझौते और कोर्ट के जरिये निपटाए जाएं। पूर्व राजपरिवार से जुडेÞ इस मामले की शिकायत भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और आरएसएस तक पहुंच गई है। राजपूत संगठनों और पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को शिकायत की है कि इस मामले में सरकार ने जानबूझकर कर कार्रवाई की है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी शिकायत की है। राजपूत संगठनों का कहना है कि देश भर के राजपूत समाज में इस प्रकरण को लेकर भाजपा और वसुंधरा राजे के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा पनप रहा है। इसका खमियाजा भाजपा को उत्तर प्रदेश में भी भुगतना पड़ सकता है।

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