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दिहाड़ी मजदूर ने बकरी बेच और आभूषण गिरवी रखकर बनवाया शौचालय, दूसरों के लिए बना मिसाल

डूंगरपुर-रतनपुर मार्ग पर सड़क के किनारे एक झोपड़ी में रहने वाला कांति लाल रोत एक मिल में दिहाड़ी मजदूरी करता है।

Author जयपुर | June 8, 2016 15:02 pm
स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाय गया शौचालय। (Representative Image)

राजस्थान के डूंगरपुर जिले के एक आदिवासी परिवार ने शौचालय बनाने के लिए अपनी आजीविका की प्रमुख साधन बकरी बेच दी तथा गहनों को गिरवी रख दिया। डूंगरपुर-रतनपुर मार्ग पर सड़क के किनारे एक झोपड़ी में रहने वाला कांति लाल रोत एक मिल में दिहाड़ी मजदूरी करता है। कांति लात मजदूरी करके अपनी विधवा मां, दिवंगत छोटे भाई की पत्नी और बच्चों तथा अपने पत्नी-बच्चों का पालन पोषण करता है। पिछले दिनों स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरपरिषद डूंगरपुर ने विशेष अभियान चलाया और लोगों को शौचालय बनवाने के लिए समझाया।

कांति लाल भी शहर से सटी बस्ती के कारण विधवा मां लाली रोत, अपनी दोनों बहुओं और खुद के लिए शौचालय की जरूरत महसूस कर रहा था लेकिन आर्थिक कारणों से यह संभव नहीं हो पा रहा था। अभियान के दौरान कांति लाल को बताया गया कि शौचालय निर्माण के लिए नगरपरिषद प्रोत्साहन राशि के रूप में केंद्र सरकार की ओर से चार हजार रूपए, राज्य सरकार की ओर से चार हजार रूपये तथा नगर परिषद की ओर से चार हजार रूपये यानी कुल मिलाकर बारह हजार रूपये दिए जाएंगे। इस पर कांति लाल शौचालय बनवाने के लिए तैयार हो गया।

उसे जब शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि के चार हजार रूपए मिले तो पूरे परिवार ने हाथों से गुड्ढा खोद लिया। शेष राशि मिलने के बाद आवश्यक सामग्री खरीद कर ऊपर का ढांचा और पानी की टंकी भी बना ली परंतु अब उनके पास कारीगरों को चुकाने के लिए राशि खत्म हो चुकी थी। कांति लाल की विधवा मां हर हाल में शौचालय बनवाना चाहती थी। मां की सलाह पर कांति लाल ने अपने घर की दैनिक जरूरतें पूरी करने वाली सात बकरियों में से एक बकरी पांच हजार रुपये में बेची और कारीगरों को मजदूरी दी।

शौचालय के दरवाजे और अन्य सामग्री के लिए उसकी पत्नी गौरी ने अपनी शादी में पीहर से आई हुई चांदी की पायल गिरवी रखने के लिए दे दी। कांतिलाल ने बाजार में पायल को गिरवी रखकर चार हजार रुपये लिए और अपना शौचालय पूर्ण करवाया।

एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, परिषद सभापति को कांति लाल द्वारा अपने घर में शौचालय बनाने के लिए बकरी बेचने और पायल को गिरवी रखे जाने की जानकारी मिली तो उन्होंने उसके घर पहुंच कर गिरवी रखी पायल को छुड़वाने के लिए अपनी तरफ से नकद चार हजार रुपये और अंतिम किश्त के चार हजार रुपयों का चेक दिया। साथ ही उन्होंने पूरे परिवार के इस समर्पण का अभिनंदन करने के लिए परिवार के मुखिया कांतिलाल, उसकी पत्नी गौरी और विधवा मां लाली रोत का स्वागत किया ।

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