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लड़कियां कॉलेज जा सकें, इसलिए पीएफ के पैसों से खरीद डाली बस

छात्राओं को कॉलेज जाने वाली बस तक पहुंचने के लिए भी धूल भरी सड़क और कड़ी धूप में 3 से छह किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। किसी तरह बस तक पहुंचती हैं तो वहां लड़के बुरा बर्ताव करते हैं। ये बात एक छात्रा ने दंपत्ति को बताई।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फोटो सोर्स-http://transport.rajasthan.gov.in)

करीब दो साल पहले बच्चों के डॉक्टर रामेश्वर प्रसाद यादव गाड़ी से राजस्थान में अपने गांव चुरी जा रहे थे। यहां रास्ते में उन्होंने देखा कि चार लड़कियां रोड के समीप मूसलाधार बारिश में भीग रही है। प्रसाद की पत्नी से रहा नहीं गया और मानवता के नाते उन्होंने लड़कियों को लिफ्ट देने को कहा। रास्ते में बातचीत के दौरान लड़कियों ने पति-पत्नी को बताया कि वो कोटपूतली स्थित कॉलेज में पढ़ने जाती हैं। यह जगह गांव से करीब 18 किलो मीटर की दूरी है और इसकी वजह से ये लड़कियां समय से कॉलेज नहीं पहुंच पाती, इस वजह से कॉलेज में उनकी जरुरी उपस्थिति भी दर्ज नहीं है। हालांकि देश के इस हिस्से में आमतौर पर बारिश नहीं होती है। मगर फिर भी इन लड़कियों को कॉलेज जाने वाली बस तक पहुंचने के लिए भी धूल भरी सड़क और कड़ी धूप में 3 से छह किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। किसी तरह बस तक पहुंचती हैं तो वहां लड़के बुरा बर्ताव करते हैं। ये बात एक छात्रा ने दंपत्ति को बताई।

मामले में डॉक्टर ने बताया कि छात्राओं की कहानी सुन हमारा दिल पसीज गया। डॉक्टर रामेश्वर प्रसाद कहते हैं, ‘हम घर पहुंचे तो पत्नी ने मुझसे कहा कि हम कुछ कर सकते हैं क्या? मैंने एक और सवाल के साथ इसका जवाब दिया। पत्नी से कहा कि अगर हमारी बेटी आज जिंदा होती तो उसकी पढ़ाई और शादी पर कितना खर्च करते? पत्नी ने जवाब दिया करीब बीस लाख रुपए।’ यादव कहते हैं, ‘उसी पल बच्चों की सुविधा के लिए मैंने एक बस खरीदने का फैसला लिया।’ सरकारी डॉक्टर प्रसाद ने बस खरीदने के लिए 17 लाख रुपए अपने पीएफ खाते निकलवाएं। ये उनके पीएफ खाते का 75 फीसदी था। इसके अलावा दो लाख रुपए सामान्य बचत से जुटाए और करीब 19 रुपए की सफेद टाटा स्टार बस खरीदी।

अब यह बस सेंट्रल राजस्थान के जौधपुर जिले में चुरी, कयामपुरा बास, बनेठी की छात्राओं को फ्री में घर से उनके कॉलेज तक ले जाती है। खास बात यह है कि यादव ने साल 2016 में जब इस सेवा की शुरुआत की तब उन्हीं चार लड़कियों को इसके उद्घाटन के लिए न्योता दिया, जिनकी कहानी सुनने के बाद इस पहल को शुरू किया गया।

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