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राजस्‍थान: पृथ्वीराज चौहान के नाम पर बन रहा जातीय त्रिकोण, किसके हाथ लगेगी विरासत?

गुर्जरों को राज्य में अपने समुदाय से अभी तक सीएम नहीं मिला है। सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं लेकिन 2018 में सीएम बनते-बनते रह गए थे।

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अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के सदस्य जयपुर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए (Express photo)

राजस्थान में गुर्जर और राजपूतों के बीच अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म पृथ्वीराज को लेकर तकरार चल रही हैं। गुर्जर मांग कर रहे हैं कि फिल्म में पृथ्वीराज चौहान को गुर्जर राजा के रूप में चित्रित किया जाए। जबकि राजपूत, जो पृथ्वीराज पर भी दावा करते हैं, उनकी मांग है कि फिल्म का नाम ‘सम्राट पृथ्वीराज’ हो।

20 मई को जयपुर में एक संवाददाता सम्मेलन में अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा ने अपने दावों के लिए पृथ्वीराजविजयमहाकाव्य’ नामक एक संस्कृत पाठ के रूप में सबूत साझा किया। उन्होंने कहा, “1191-21 में पृथ्वीराज चौहान के दरबार में काम करने वाले कश्मीरी कवि जयनक द्वारा लिखे गए इस पाठ में राजा के संदर्भ में गुर्जर जाति के बारे में वर्णन है।”

उन्होंने चंद बरदाई के एक अन्य महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ का हवाला दिया, जो लगभग 1400 पिंगल लिपि (ब्रज और राजस्थानी का एक संयोजन) में लिखा गया था। इसमें पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर को गुर्जर बताया गया है। अन्य सबूतों के अलावा गुर्जर महासभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने सीबीएसई और भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) में पृथ्वीराज के लिए राजपूत जाति के दावे के बारे में पूछताछ करने के लिए आरटीआई दायर की थी, और उन्हें असंगत जवाब मिला।

गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने फिल्म निर्माताओं को नोटिस भेजा था और लेखक-निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी को बुलाया था, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष भार्गड ने कहा कि पिछले साल से उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में और राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ विभिन्न स्तरों पर इस मुद्दे को उठाया है।

मनीष भार्गड ने कहा, “हम दुश्मनी नहीं बढ़ाना चाहते। यदि पृथ्वीराज चौहान को सही ढंग से चित्रित नहीं किया गया तो हम वास्तव में विरोध करेंगे। करणी सेना की तरह हम जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक 22 राज्यों में हैं।” वहीं राजपूत नाम जोड़ने की मांग संयोग से करणी सेना की ओर से आ रही है, जो राजस्थान में समुदाय या फिल्मों से संबंधित किसी भी विवाद से दूर नहीं है।

श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक अजीत सिंह ममडोली ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “यह सच कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान एक राजपूत राजा थे और ये इतिहास की किताबों में अच्छी तरह से स्थापित है। लेकिन एक नया विवाद पैदा किया जा रहा है। कुछ राजनीतिक ताकतें राजपूतों और गुर्जरों के बीच घर्षण पैदा करने पर तुली हुई हैं। फिल्म निर्माता विवाद को पसंद करते हैं क्योंकि इससे दर्शकों की संख्या बढ़ सकती है।”

करणी सेना ने कहा कि जब शूटिंग चल रही थी तो उन्होंने फिल्म निर्माताओं से फिल्म के शीर्षक को विस्तार करने का आग्रह करने के लिए संपर्क किया था। उन्होंने कहा, “जहाँ भी आप सम्राट पृथ्वीराज का संदर्भ देखते हैं, चाहे वह उनकी मूर्तियाँ हों या पाठ्यपुस्तकें आदि, वह ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ है। लेकिन फिल्म निर्माता न तो सम्राट का उपयोग कर रहे हैं और न ही चौहान। इसलिए अगर वे दोनों के बिना आगे बढ़ते हैं, तो करणी सेना फिल्म का विरोध करेगी।”

पिछले साल गुर्जरों और राजपूतों दोनों ने एक अन्य ऐतिहासिक व्यक्ति राजा मिहिर भोज पर दावा किया था। राजस्थान ने आनंद पाल सिंह जैसे गैंगस्टरों की हत्या पर राजपूत राजनीति को भी देखा है। समुदाय द्वारा विरोध के साथ सरकार को सीबीआई जांच की मांग करने के लिए मजबूर किया गया था।

ऐसा लगता है कि गुर्जर महासभा करणी सेना से सबक लेने और समुदाय का समर्थन पाने के लिए प्रयास कर रही है। राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव हैं। राजस्थान में भैरों सिंह शेखावत एक राजपूत सीएम रहे हैं, जिन्होंने तीन बार पद संभाला है। गुर्जरों को राज्य में अपने समुदाय से अभी तक सीएम नहीं मिला है। सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं लेकिन 2018 में सीएम बनते बनते रह गए थे और उन्हें डिप्टी सीएम पद से संतोष करना पड़ा था।

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