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राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी पर लगाम लगाने की कवायद

प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत ने गुजरात की तर्ज पर राजस्थान कांग्रेस के नेताओं को डिनर कूटनीति के तहत एकजुट करने की मुहिम चलाई है।

Author जयपुर | Published on: September 28, 2016 6:24 AM
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट

राजस्थान में चुनावी हार के बाद से ही खेमेबाजी में बंटी कांग्रेस को एकजुट करने के लिए नए सिरे से कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत ने गुजरात की तर्ज पर राजस्थान कांग्रेस के नेताओं को डिनर कूटनीति के तहत एकजुट करने की मुहिम चलाई है। इस कड़ी में पहला रात्रिभोज पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तरफ से यहां तीन अक्तूबर को देना तय हुआ है। इसमें राज्य के तमाम बडेÞ कांग्रेसी नेता शामिल होंगे।
राज्य में विधानसभा चुनाव की हार के बाद से ही गुटबाजी में उलझी प्रदेश कांग्रेस को अगले विधानसभा चुनाव को लेकर चिंता सताने लगी है। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव कामत ने गुजरात कांग्रेस के नेताओं की खेमेबाजी को डिनर डिप्लोमेसी के जरिए कम करने में सफलता हासिल की थी। कामत वह फार्मूला अब राजस्थान के नेताओं पर अपना रहे हैं। उनके निर्देश पर ही पहला रात्रिभोज पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत की मेजबानी में यहां होगा। इसके लिए गहलोत ने यहां पहला न्योता पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया को उनके घर पर जाकर दे दिया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कामत को राजस्थान के नेताओं की गुटबाजी दूर करने का विशेष जिम्मा भी सौंपा है।

कामत ने पिछले कुछ समय से राजस्थान के नेताओं से अलग अलग मुलाकात कर उनके बीच पनपे मतभेदों की जानकारी जुटाई थी। इसमें सामने आया था कि राज्य के नेताओं के बीच संवाद की कमी के साथ एक दूसरे के समर्थकों के बीच अविश्वास की भावना भी है। इसे दूर करने के लिए ही सभी नेताओं को एक साथ बैठाने की रणनीति बनाई गई है।कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के भोज के 15 दिन बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट इसी तरह के भोज का आयोजन करेंगे। इसके बाद अन्य नेताओं को भी इस परंपरा को निभाना होगा। गहलोत के घर पर होने वाले भोज में पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व और मौजूदा प्रतिपक्ष के नेताओं के अलावा कई प्रमुख नेताओं को इन भोजों में बुलाया जाएगा। इसमें उनके बीच आपसी बातचीत और संगठन को मजबूत करने के बारे में विचार विमर्श होगा। गुजरात में इस तरह से नेताओं के बीच मनमुटाव दूर किया गया था। कामत की सोच है कि जब प्रदेश के सभी बडे नेता एक साथ बैठेंगे, तो समस्याएं दूर होंगी। इससे निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में भी अच्छा संदेश जाएगा।

राज्य में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक इन दिनों बंटे हुए हैं। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी, गिरिजा व्यास के अलावा जाट समाज के नेताओं के अलग-अलग गुट बने हुए हैं। इन गुटों की आपसी खींचतान के कारण ही जमीनी स्तर पर कांग्रेस असरदार नहीं हो पा रही है।कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि राजस्थान ही भाजपा शासित प्रदेशों में सबसे कमजोर स्थिति में है। राजस्थान में भाजपा सरकार की छवि बहुत बिगड़ गई है। इस हालत का फायदा कांग्रेस तभी ठीक से उठा पाएगी जब एकजुट होकर मैदान में उतरें। इसके लिए पार्टी को समय रहते ही मजबूती के साथ जनता को संदेश देने के कदम उठाने चाहिए।

 

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