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राजस्थान: उपचुनावों में बीजेपी के साथ कांग्रेस की भी मुश्किलें बढ़ीं, बेरोजगारों का संगठन भी चुनाव में कूदा

राज्य में 29 जनवरी को होने वाले तीन उपचुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवार तलाशने में जुटे हैं।

Author जयपुर | December 31, 2017 02:39 am
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान में अजमेर और अलवर लोकसभा सीट व मांडलगढ़ विधानसभा के उपचुनाव में अब भाजपा को बेरोजगारों से भी चुनौती मिलेगी। राज्य के बेरोजगार युवाओं के संगठन ने भी उपचुनाव में ताल ठोकने का एलान कर भाजपा के साथ ही कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजस्थान एकीकृत बेरोजगार महासंघ ने दो सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर उपचुनावों को रोचक बना दिया है। राज्य में 29 जनवरी को होने वाले तीन उपचुनावों को लेकर भाजपा और कांग्रेस अपने उम्मीदवार तलाशने में जुटे हैं। भाजपा और कांग्रेस जैसे राजनीतिक दलों को अब युवाओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ ने अजमेर और माडंलगढ़ सीट पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।

महासंघ का कहना है कि उसके दोनों उम्मीदवार पूरी तरह से बेरोजगार और स्थानीय हैं। महासंघ ने अजमेर लोकसभा सीट से हरीश चंद्र त्रिपाठी और मांडलगढ़ विधानसभा सीट से हरी लाल को उम्मीदवार बनाया है। महासंघ का कहना है कि अलवर लोकसभा सीट से भी दमदार बेरोजगार युवा को उम्मीदवार बनाया जाएगा। महासंघ का दावा है कि प्रमुख राजनीतिक दल चुनावों में युवाओं का इस्तेमाल करते है। युवाओं की बदौलत ही उन्हें जीत मिलती है पर अब हालात अलग होंगे। अजमेर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाए गए हरीश त्रिपाठी बीए बीएड हैं और अरसे से बेरोजगार हैं। इसी तरह से माडंलगढ़ से उम्मीदवार बनाए गए हरी लाल जाट भी शिक्षित बेरोजगार हैं और रोजगार नहीं मिलने से युवाओं को संगठित कर सरकार के खिलाफ अरसे से संघर्ष कर रहे हैं।बेरोजगार महासंघ ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती के लिए कई आंदोलन चलाए हैं।

बेरोजगार एकीकृत महासंघ का कहना है कि राज्य में ज्यादातर सरकारी नौकरियों की भर्तियां सरकार की गलत नीतियों के कारण अटकी हुई है। बेरोजगारों का सबसे ज्यादा गुस्सा भाजपा सरकार के प्रति है। उनका कहना है कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले 15 लाख युवाओं को रोजगार का वादा किया था। भाजपा ने अपने चार साल के शासन में एक भी युवा को नौकरी नहीं दी। इसके उलट पूर्व में लोक सेवा आयोग और अन्य सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को जटिल बना कर उन्हें अदालती रोक में अटका दिया है। सरकार नौकरियों पर अदालती रोक हटवाने के लिए भी कोई प्रयास नहीं करती है। इसके कारण राजस्थान में शिक्षकों की भर्ती के साथ तमाम तरह की नौकरियां अटकी हुई हैं। बेरोजगारी से तंग आकर और भाजपा सरकार को सबक सिखाने के मकसद से ही उनके संगठन ने अब उपचुनावों में उतरने का फैसला किया है।

 

 

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