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अपनों के निशाने पर है वसुंधरा सरकार

जयपुर के भाजपाई अब सरकार से किसी भी तरह के विकास कार्य की उम्मीद नहीं रख रहे हैं।

Author जयपुर | Published on: August 29, 2016 5:14 AM
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार की कार्यशैली को लेकर भाजपा के ही नेता अब निशाने साधने लगे हैं। प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रवक्ता कैलाशनाथ भट्ट ने राजधानी जयपुर में नौकरशाही की कारस्तानी को लेकर अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। भट्ट से पहले जयपुर के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी भी अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर नाखुशी जता चुके हैं। प्रदेश में भाजपा के मजबूत गढ के रूप में पहचान बनाने वाला जयपुर ही अब उसके शासन में दुर्दशा का शिकार है। जयपुर शहर के तीन विधायक अरुण चतुर्वेदी, कालीचरण सर्राफ और राजपाल सिंह शेखावत तो भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। एक विधायक अशोक परनामी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। इतने ताकतवर विधायकों के बावजूद जयपुर शहर में सिर्फ नौकरशाहों की ही तूती बोल रही है। इन हालात में जयपुर के भाजपाई अब सरकार से किसी भी तरह के विकास कार्य की उम्मीद नहीं रख रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अब सरकार के बचे दो साल के कार्यकाल में किसी भी तरह के विकास की उम्मीद नहीं है। जयपुर में सड़कों के साथ ही ट्रैफिक के हालात बिगड़े हुए हैं। अपराधों में खासी बढोतरी हो गई है। प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रवक्ता कैलाश नाथ भट्ट ने इन्हीं मामलों को अपने फेसबुक पर उठा कर पार्टी में हलचल मचा दी है।

भट्ट ने साफ तौर पर उन मुद्दों को उठाया है जिनके चलते ही भाजपा के ढाई साल के शासन के दौरान आम आदमी में सरकार की छवि बिगड़ी है। भट्ट ने जयपुर में सरकारी गोशाला में गायों की मौत पर भी जोरदार तरीके से हमला बोला है। उनका कहना है कि गायों को हिंगोनिया गौशााला में मरने के लिए छोड़ दिया गया। इस मामले में भाजपा सरकार को देश भर में किरकिरी का सामना करना पड़ रहा है। भट्ट ने जयपुर शहर में मंदिरों को तोड़े जाने के मुद्दे पर लिखा कि इसमें आमजन को भरोसे में नहीं लिया गया। इस मामले में आरएसएस ने भी जयपुर शहर में बड़ा आंदोलन किया था। इस मामले में जयपुर के तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर की भूमिका संदेह में थी। भट्ट ने ट्रैफिक नियमों की पालना की आड़ में युवाओं से जयपुर शहर में पुलिस की चौथवसूली पर भी सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि इसके जरिए नवयुवक भाजपा सरकार के विरोधी होते जा रहे हैं।

भट्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण की हाल की दो बड़ी कार्रवाई पर तो अपनी ही सरकार को लपेट लिया। उन्होंने कॉलोनी और मोहल्लों में स्थित निजी अस्पताल और मेडिकल की दुकानों को अचानक सीज किए जाने पर एतराज जताया है। प्राधिकरण ने हाल में एक बड़े निजी अस्पताल को अचानक ही सीज कर दिया। इसके विरोध में जयपुर के तमाम प्राइवेट अस्पताल रविवार से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने जयपुर के कई इलाकों में नियमों के विपरीत बगैर नक्शे पास कराए बड़ी संख्या में बन रही इमारतों को बनने देने में प्राधिकरण की मिलीभगत को भी उठाया है। इसके साथ ही जयपुर में पूर्व राजपरिवार से जुड़े राजमहल होटल की संपत्ति पर प्राधिकरण के कब्जे को भी उन्होंने उठाया है। इस होटल को लेकर शहर के लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। यह पूरी संपत्ति अभी पूर्व राजपरिवार की दीया कुमारी के पास है जो भाजपा की ही विधायक हैं। भट्ट ने लिखा है कि इस पर किए गए कब्जे के तमाशे की जरूरत ही नहीं थी। राजपरिवार से बातचीत के जरिए इस मसले को सुलझाया जा सकता था।

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