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राजस्थानः बड़ी आबादी के लिए पीने का साफ पानी अभी भी है सपना

राजस्थान में लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराना आज भी एक चुनौती है। प्रदेश के लोग दूषित पानी पीने के कारण असमय ही अपंग बन जाते हैं।

Author जयपुर। | September 26, 2018 6:20 AM
प्रदेश में साफ पेयजल की योजनाओं के लिए तीन साल में ही केंद्र ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत 3166 करोड़ रुपए की राशि आबंटित की है।

राजस्थान में लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराना आज भी एक चुनौती है। प्रदेश के लोग दूषित पानी पीने के कारण असमय ही अपंग बन जाते हैं। प्रदेश में साफ पेयजल की योजनाओं के लिए तीन साल में ही केंद्र ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत 3166 करोड़ रुपए की राशि आबंटित की है। राज्य सरकार ने इसमें से तीन हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च भी कर दी, इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में प्रदूषित पानी की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। प्रदेश में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान तीन वर्षों से जोर शोर से चल रहा है और जल संरक्षण की दिशा में बहुत काम भी हुआ पर सरकार का ध्यान साफ पानी पिलाने की तरफ नहीं जा रहा है।

प्रदेश का हर पांचवां आदमी रसायनयुक्त पानी पी रहा है। दूषित पेयजल में राजस्थान अव्वल प्रदेश की श्रेणी में है। अकेले बाड़मेर जिले में ही 15 लाख लोग दूषित जल पी रहे हैं। नागौर जिले में 12 लाख लोग दूषित जल पीकर बीमारियों की चपेट में हैं। केंद्रीय पेयजल स्वच्छता मंत्रालय की रिपोर्ट में राजस्थान को सबसे ज्यादा प्रदूषित जल पीने वाला प्रदेश बताया गया है। यह रिपोर्ट इसी साल 15 अप्रैल को जारी की गई थी। प्रदेश की 19575 बस्तियों में प्रदूषित पानी पीया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में फलोराइड से प्रभावित 6159, नाइट्रेट प्रभावित 1074, लवण प्रभावित 12656 और लोहा प्रभावित पांच बसावट हैं। दूषित पानी वाले जिलों के आंकड़े देखने से ही मालूम चल जाता है कि हालात भयावह हैं।

बाड़मेर जिले के 9295, नागौर जिले के 1246, भरतपुर जिले के 599, जालोर जिले के 675, जोधपुर जिले के 3265, सिरोही जिले के 132, जयपुर जिले के 348, चूरू जिले के 174, पाली जिले के 217 और बीकानेर जिले के 140 गावों में तो दूषित जल पीने को लोग मजबूर हैं। इन दस जिलों के अलावा भी कई जिलों के गांवों में लोग फ्लोराइड, नाइट्रेट और खारा पानी पी रहे हैं। प्रदेश के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं करा पाने पर हाईकोर्ट भी सरकार से कई बार अपनी नाराजगी जता चुका है। प्रदेश के बांधों में शुद्ध पानी नहीं होने पर लोक संपत्ति संरक्षण समिति ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इस मामले को उठाया है। समिति ने बताया कि जयपुर में 31 बांध हैं, जिनमें से 28 सूख चुके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष बाफना का कहना है कि सरकार की नाकामी के कारण लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ रहा है। फ्लोराइड की अधिकता से हड्डी-दांतों पर सीधा असर पड़ता है। टोंक, अजमेर, सवाई माधोपुर और जयपुर जिले के ग्रामीण इलाकों के लोग कुबड़े हो रहे हैं। और जल्द बुढ़ापे की तरफ बढ़ रहे हैं।

सरकार पूरी मुस्तैदी से लोगों को साफ पीने का पानी मुहैया कराने में लगी है। उन्होंने कहा कि नलों से लोगों के घरों में पानी पहुंचाने में राजस्थान बहुत पीछे है। सरकार लोगों को शुद्व पानी मुहैया कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। घरों में लोगों को साफ पानी मिलें, इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार दूरगामी और अल्पकालीन योजनाओं को लागू कर रही है। -सुरेंद्र गोयल, प्रदेश के जन स्वास्थ्य मंत्री

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