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जनसत्ता विशेष: 17 जिलों में फैला स्वाइन फ्लू, डॉक्टरों की छुट्टियां रद्द

राजस्थान में नए साल में ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। अब यह बीमारी 33 जिलों में से 17 में फैल चुकी है और 22 जिले संदिग्ध श्रेणी में आ गए हैं। प्रदेश में बीते साल इस बीमारी से 221 लोगों की मौत हो गई थी।

Author जयपुर | January 9, 2019 5:08 AM
2018 में इस बीमारी से 221 लोगों की मौत हो गई थी। इस साल की शुरुआत में ही जोधपुर, जयपुर समेत कई जिलों में स्वाइन फ्लू के पोजीटिव मरीज सामने आते ही चिकित्सा विभाग ने प्रदेश भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है

राजस्थान में नए साल में ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। अब यह बीमारी 33 जिलों में से 17 में फैल चुकी है और 22 जिले संदिग्ध श्रेणी में आ गए हैं। प्रदेश में बीते साल इस बीमारी से 221 लोगों की मौत हो गई थी। इस साल की शुरुआत में ही जोधपुर, जयपुर समेत कई जिलों में स्वाइन फ्लू के पोजीटिव मरीज सामने आते ही चिकित्सा विभाग ने प्रदेश भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और डॉक्टरों-नर्सिंग स्टाफ की छुट्टियां निरस्त कर दी हैं। सरकार के आला स्तर पर भी स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए लगातार बैठकें हो रही हैं। साल के शुरुआती सप्ताह में ही छह लोगों की मौत से पूरा चिकित्सा महकमा सतर्कता बरत रहा है। बीमारी से निपटने के लिए सरकार ने गाइड लाइन जारी करते हुए उसका पालन करना अनिवार्य कर दिया है। चिकित्सा विभाग के अनुसार बीते साल पोजीटिव मरीजों का आंकड़ा 2300 से ज्यादा था और 221 लोगों की मौत हो गई थी। इस वर्ष के शुरुआती छह दिन में ही 14 जिलों में सौ से ज्यादा मरीज सामने आने से हड़कंप मच गया है। इसमें मौतों की संख्या भी छह हो गई है।

चिकित्सा विभाग के अनुसार जोधपुर में 40, जयपुर में 22, उदयपुर में 10, पाली में 8, अजमेर में 7, सीकर में 4, दौसा में 6, बाडमेर में 5, कोटा में 5, टोंक में 4, जैसलमेर में 3, अलवर में 3, झुंझनूं में 2, राजसमंद में 2 मरीज पोजीटिव मिले हैं। इन सभी का गहन चिकित्सा इकाई में उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा संदिग्ध मरीजों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है। सरकार ने जो गाइड लाइन जारी की है उसके अनुसार चिकित्सा विभाग की टीम संदिग्ध इलाकों में जाकर घर-घर स्क्रीनिंग करेगी। स्वाइन फ्लू की दवा सभी चिकित्सा केंद्रों पर हर समय उपलब्ध रहेगी। प्रदेश के बड़े अस्पतालों में अलग से आउटडोर और वार्ड स्थापित किए गए हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी नियंत्रण कक्ष हर जिले में बनाए गए हैं। जोधपुर में बढ़ते प्रकोप के बाद जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भेजी गई है। साथ ही दूरदराज के इलाकों में भी डॉक्टरों को लगाया गया है।

डॉक्टर एनएम गुप्ता का कहना है कि यह बीमारी संक्रमण से फैलती है। इसे लेकर आमजन में अभी तक जागरूकता नहीं है। पोजीटिव मरीज मिलने पर उसे उचित आइसोलेशन में रखा जाना चाहिए। बीमारी के लक्ष्ण नजर आते ही उसे फौरन चिकित्सक से संपर्क कर उपचार शुरू करवाना चाहिए। इसके साथ ही परिवार के अन्य सदस्य और पूरे मोहल्ले की भी स्क्रीनिंग की जानी चाहिए। इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ज्यादा आने-जाने वाले इलाकों में मास्क लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और हवाई अड्डों समेत कई स्थानों पर स्क्रीनिंग का इंतजाम होना चाहिए।

लगातार हो रहीं निगरानी बैठकें- स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप को लेकर सरकार पूरी गंभीरता से इसकी रोकथाम के इंतजाम में लगी है। साथ ही मरीजों के उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार निगरानी बैठकें हो रही हैं। प्रदेश में जिस जगह से भी स्वाइन फ्लू की जानकारी मिल रही है, वहां चिकित्सा विभाग की टीम पहुंच कर संदिग्धों के उपचार में लग रही है। संभाग के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें तैनात कर दी गई हैं। उनका कहना है कि इस बीमारी से घबराने की जरूरत नहीं है। बीमारी के लक्षण नजर आते ही चिकित्सक की सलाह से उपचार शुरू कराया जाए। सरकार ने सभी चिकित्सा केंद्रों पर इसकी दवा मुहैया करा दी है।
-डॉक्टर रघु शर्मा, राजस्थान के चिकित्सा मंत्री

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