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जयपुर: वाकई बीमार है एम्स को पीछे छोड़ने वाला सवाई मानसिंह अस्पताल अस्पताल

राजस्थान के सबसे बडे सवाई मानसिंह अस्पताल अस्पताल के हालात दिनों दिन बदतर होते जा रहे हैं। यह अस्पताल अब देश में सबसे ज्यादा ओपीडी मरीजों वाला बन गया है।
Author जयपुर | July 20, 2017 05:35 am
यह अस्पताल अब देश में सबसे ज्यादा ओपीडी मरीजों वाला बन गया है। इस मामले में इसने दिल्ली के एम्स को चार साल पहले पीछे छोड़ दिया था।

राजस्थान के सबसे बडे सवाई मानसिंह अस्पताल अस्पताल के हालात दिनों दिन बदतर होते जा रहे हैं। यह अस्पताल अब देश में सबसे ज्यादा ओपीडी मरीजों वाला बन गया है। इस मामले में इसने दिल्ली के एम्स को चार साल पहले पीछे छोड़ दिया था। एसएमएस अस्पताल की ओपीडी में साल भर में 30 से 35 लाख मरीज आते हैं। इस लिहाज से यह संख्या देश के किसी भी अस्पताल में आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा आंकी गई है। मरीजों को सुविधाओं के अभाव में भटकना पडता है और अस्पताल में बढती भीड़ के कारण डॉक्टरों और मरीजों के तीमारदारों के बीच टकराव के हालात हमेशा बने रहते है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी से जूझ रहे इस अस्पताल पर मरीजों का भार कम करने में सरकार अभी तक किसी नई योजना को बनाने में नाकाम साबित हुई है।

देश के बडे अस्पतालों में शुमार एसएमएस में मरीजों की सुविधाओं के साथ बेहतर इलाज के लिए सरकार हर बार इसके बजट में बढ़ोतरी करती है। अस्पताल के अंदर गंदगी और अतिक्रमणों के कारण तो कई बार यह खुद बीमारों जैसा भवन लगता है। अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों के बुरे बर्ताव का शिकार मरीज और उनके साथ आने वाले तीमारदार होते रहते हैं। इस कारण कई बार झगड़े होने से अस्पताल के रेजिडेंट और नर्सिंग कर्मचारियों की हड़ताल और काम बंद जैसी घटनाओं से मरीजों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्पताल की गंदगी और आॅपरेशन के लिए कई दिनों का इंतजार करना मरीजों के लिए असहनीय हो जाता है। अस्पताल में आग लगने जैसी घटनाओं की रोकथाम पर अभी तक कोई विशेष ध्यान नहीं दिया है। अस्पताल को आग लगने जैसी घटनाओं पर काबू पाने के लिए नगर निगम की दमकल सेवाओं पर ही निर्भर रहना पडता है। वार्डों में मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण उन्हें पलंग मुहैया नहीं होने पर जमीन पर ही लेट कर अपना उपचार कराने के लिए मजबूर भी होना पडता है।

प्रदेश का सबसे बडा अस्पताल होने के कारण इसमें भर्ती मरीजों को असुरक्षित माहौल में ही अपना इलाज करवाना पडता है। अस्पताल में ढाई हजार मरीज हमेशा भर्ती रहते है। प्रदेश के पड़ोसी हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक से मरीज इस अस्पताल में अपना इलाज करवाने आते हैं।

सरकार इस तरफ विशेष ध्यान दे रही है। अस्पताल में एक हजार डॉक्टरों के साथ उनके सहयोग के लिए करीब 8000 हजार नर्सिंग और अन्य कर्मचारी काम कर रहे हैं। एसएमएस मेडिकल कालेज से जुड़ा होने के कारण अस्पताल को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल रही हैं। अस्पताल में पिछले दिनों पहली बार पेनक्रियाज कैंसर के मरीज की लेप्रोस्कोपी से सर्जरी हुई। यह मरीज गरीब तबके का था और उसका पूरा इलाज भामाशाह स्वास्थ बीमा योजना के तहत हुआ। मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है। इसी तरह अस्पताल में इलाज के आधुनिक तरीके इस्तेमाल होने से ही यहां दूरदराज के लोग भी अपना इलाज कराने आते है।
जगदीश मोदी
अस्पताल उपअधीक्षक

 

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