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राजस्थान: सूदखोरी का फैलता जाल, बढ़ती आत्महत्याएं और पुलिस लाचार

राजस्थान में चल रहा सूदखोरी का धंधा लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। राज्य में ब्याज पर रकम उधार देने वाले लोगों का तंत्र अब माफिया के तौर पर उभर कर भी सामने आ रहा है।

Author जयपुर। | July 11, 2018 08:33 am
सूदखोरों से तंग आकर आत्महत्या का एक मामला कोटा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पिछले हफ्ते सामने आया।

राजस्थान में चल रहा सूदखोरी का धंधा लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। राज्य में ब्याज पर रकम उधार देने वाले लोगों का तंत्र अब माफिया के तौर पर उभर कर भी सामने आ रहा है। इससे तंग लोगों के आत्महत्याएं करने की खबरें भी सामने आई हैं। प्रदेश में पिछले दिनों अलग अलग शहरों में कई लोगों ने खुदकुशी की तो उसके पीछे सूदखोरों के परेशान करने की वजह ही सामने आई। ऐसे मामलों में पुलिस भी अपनी लाचारी दिखाती है और सिर्फ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल देती है।

प्रदेश में पिछले हफ्ते आधा दर्जन मामले आत्महत्या के ऐसे सामने आए जिनमें खुदकुशी करने वालों ने इसके लिए ब्याज की तय रकम से कई गुना ज्यादा चुकाने के बावजूद सूदखोर के परेशान करने की बात कही है। सूदखोरी का जाल कमोबेश प्रदेश के हर इलाके में फैला है लेकिन सीकर, झुंझनूं, जयपुर, कोटा, जोधपुर जैसे जिलों में ब्याज माफिया का पूरा नेटवर्क खड़ा हो गया है। ब्याज पर रकम मुहैया कराने वाले लोगों का यह धंधा पूरी तरह से गैरकानूनी है पर उसके खात्मे के लिए सरकार की तरफ से कभी कोई कदम नहीं उठाया गया है।

सूदखोरों से तंग आकर आत्महत्या का एक मामला कोटा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पिछले हफ्ते सामने आया। इसमें पिता ने अपने दो जवान बेटों के साथ आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने वाले प्रकाश चंद्र जैन ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि उसने कैथून निवासी एक व्यक्ति से एक लाख रुपए ब्याज पर उधार लिए थे। रकम देने वाले ने ब्याज काट कर उसे रकम दी। प्रकाश चंद्र ने लिखा कि उसने तय ब्याज से कई गुना चुका दिया, इसके बावजूद सूरज ने डरा धमका कर उससे खाली स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए। उसके साथ चार-पांच गुंडे थे और उन्होंने उस पर ज्यादा रकम देने का दबाव बनाया। इससे परेशान होकर प्रकाश चंद्र ने 30 साल के बेटे तरुण और 28 साल के बेटे अनिल के साथ ट्रेन से कट कर आत्महत्या कर ली।

इसी तरह से सीकर के चूड़ी कारोबारी जावेद ने उधार से ज्यादा रकम चुकाने के बावजूद सूदखोर और उसके लोगों के आए दिन धमकाने से परेशान हो घर में फांसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली। जावेद के परिजनों ने पुलिस को जो रिपोर्ट दी है उसमें कहा कि चार गुना ज्यादा रकम चुकाने के बावजूद उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी तरह से जयपुर के एक चाय व्यापारी सुखपाल चंद मेहता ने अपने सुसाइड नोट में सूदखोरों के आतंक की कहानी बयां करते हुए नागौर की एक धर्मशाला में जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली।

झुंझनूं के सुभाष कुमावत को तो ज्यादा रकम नहीं चुकाने पर सूदखोर ने उसके बच्चे तक उठा ले जाने की धमकी दे डाली। कुमावत ने जब इस मामले की पुलिस में रिपोर्ट दी तो उलटे पुलिस ने उससे सूदखोर से समझौता करवाने की बात कह कर टरका दिया।
कोटा के परिवार के तीन लोगों के सामूहिक आत्महत्या के मामले में पुलिस के जांच अधिकारी लोकेंद्र पालीवाल का कहना है कि आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। जैन के सुसाइड नोट के आधार पर आरोपी के खिलाफ आइपीसी की धारा 306 में मुकदमा दर्ज किया गया है।

आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ में ही ब्याज पर रकम देना या नहीं देने का खुलासा होगा। सूदखोरों के बढ़ते जाल और उनसे पीड़ित लोगों के आत्महत्या करने की प्रवृत्ति को जयपुर के सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष बाफना बेहद चिंताजनक बताते हैं।
बाफना का कहना है कि इस तरह के मामले छोटी रकम लेकर अपना काम करने वाले लोगों के ही सामने आ रहे है। बैंकों और मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थाओं की कर्ज देने की प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि सामान्य आदमी उसकी बजाय ऐसे सूदखोरों के चंगुल में फंस जाता है। बाफना का कहना है कि सरकार को गैरकानूनी तौर पर सूदखोरी करने वाले लोगों पर लगाम लगानी चाहिए।

बगैर लाइसेंस के ही उधार दे रहे लोग

कर कानूनों से जुड़े वकील आरके विजय का कहना है कि आयकर अधिनियम की धारा-269 के तहत कोई भी व्यक्ति किसी को 20 हजार रुपए से ज्यादा की रकम उधार नहीं दे सकता है। ऐसा करने पर उसके खिलाफ पेनल्टी का प्रावधान है। बगैर लाइसेंस के भी कोई भी व्यक्ति इस तरह का लेनदेन नहीं कर सकता है। ऐसा करना गैरकानूनी है और वित्तीय लेनदेन के लिए एक फर्म बनानी होती है जो पंजीकृत होती है तभी कोई किसी को ब्याज पर उधार रकम दे सकता है। इसमें भी रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के अनुसार ही लेनदेन हो सकता है और उस पर 13 फीसद से ज्यादा ब्याज भी नहीं लिया जा सकता है। इसके उलट बगैर लाइसेंस के ही जो लोग उधार लेनदेन कर रहे है वे मनमाना ब्याज वसूल कर लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं।

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