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बलात्कार मामले में फंसे पूर्व मंत्री नागर को अदालत ने बरी किया, पिछले सवा तीन साल से थे जेल में

नागर लगातार तीन बार से जयपुर जिले की दूदू विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक बनते आ रहे थे।

Author जयपुर | January 31, 2017 3:08 AM
सांकेतिक तस्वीर

राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार में ताकतवर मंत्री रहे बाबूलाल नागर दुष्कर्म के आरोप से बरी हो गए हैं। वे इस मामले में पिछले सवा तीन साल से जेल में बंद थे। नागर के खिलाफ एक महिला ने सरकारी आवास पर ही दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। इस मामले की जांच सीबीआइ ने की थी। नागर के बरी होने से उनके समर्थकों ने अदालत परिसर के बाहर खुशी जताई। फैसले के बाद पीड़िता ने कहा कि वे इसे हाई कोर्ट में चुनौती देगी।  राज्य में पूर्व सरकार के दौरान मंत्री पर ही सरकारी बंग्ले में महिला से दुष्कर्म का आरोप लगने से सनसनी फैल गई थी। प्रदेश के इस चर्चित मामले के तूल पकड़ने से तत्कालीन सरकार ने अपने मंत्री पर लगे आरोपों का मामला सीबीआइ को सौंप दिया था। सीबीआइ ने नागर को गिरफ्तार कर चालान अदालत में पेश कर दिया था। जयपुर की अपर जिला व सत्र अदालत ने सोमवार को इस चर्चित मामले का फैसला सुनाते हुए नागर को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया।

फैसले के बाद पीड़िता ने कहा कि वह इसे हाई कोर्ट में चुनौती देगी। पीड़िता ने अदालत के बाहर मीडिया से बातचीत में नागर और उनकी टीम पर गंभीर आरोप भी लगाए। पीड़िता का कहना है कि उसने कुछ दिन पूर्व अपील भी कि थी कि उसका मुकदमा दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दिया जाए। पर ऐसा नहीं हुआ और अब उसके सामने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का ही विकल्प है। महिला ने अदालत में दिए गए इस्तगासे से ही केस दर्ज कराया था।
कांग्रेस सरकार के पूर्व मंत्री नागर से जुडेÞ इस मामले के फैसले का यहां के सियासी हलकों में बेसब्री से इंतजार था। फैसले के दौरान सोमवार को अदालत का कक्ष पक्ष और विपक्ष के वकीलों के साथ ही नागर समर्थकों से खचाखच भरा था। मामला दर्ज होने के बाद से ही नागर करीब सवा तीन साल से जेल में थे। अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बयान दिया था कि पूर्व मंत्री नागर ने 11 सितंबर 2013 को सिविल लाइंस स्थित सरकारी घर पर फोन कर बुलाया और दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

दूसरी तरफ बचाव पक्ष ने पीड़िता के बयानों को मनगढंÞत करार देते हुए घटना नहीं होने के कई साक्ष्य और गवाह पेश किए। बचाव पक्ष का कहना था कि पीड़िता जिस दिन घटना होने की बात बता रही है उस दिन बंगले पर दूदू विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की बैठक थी। इस दौरान सैंकड़ों लोग वहां मौजूद थे और नागर कार्यकर्ताओं से मिल रहे थे। राजनीतिक विरोधी उनका कैरियर खराब करने के मकसद से पीड़िता को मोहरा बना रहे हैं। दुष्कर्म की कोई घटना नहीं हुई और पीड़िता के आरोप झूठे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की पूरी बहस के बाद सोमवार को संदेह का लाभ देते हुए नागर को बरी करने का फैसला सुनाया। फैसले के बाद पूर्व मंत्री नागर के आंसू छलक आए। नागर लगातार तीन बार से जयपुर जिले की दूदू विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक बनते आ रहे थे।

 

 

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