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राजस्थान: कम बारिश, फसल बर्बादी की आशंका से किसान चिंतित

राजस्थान में इस बार कम बारिश के कारण एक दर्जन से ज्यादा जिलों में अकाल के हालात बन गए हैं। इससे प्रदेश के किसानों में चिंता पनप गई है तो दूसरी तरफ लोगों के सामने पीने के पानी के संकट के साथ ही पशुओं के लिए भी चारे पानी का संकट खडा होने के आसार बन गए हैं।

Author जयपुर। | Published on: October 17, 2018 4:01 AM
राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग को मौसम विभाग से मिली सूचना के मुताबिक राजस्थान में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल सौ मिलीमीटर बारिश कम हुई है।

राजस्थान में इस बार कम बारिश के कारण एक दर्जन से ज्यादा जिलों में अकाल के हालात बन गए हैं। इससे प्रदेश के किसानों में चिंता पनप गई है तो दूसरी तरफ लोगों के सामने पीने के पानी के संकट के साथ ही पशुओं के लिए भी चारे पानी का संकट खडा होने के आसार बन गए हैं। प्रदेश में सरकार ने भी हालात की गंभीरता को देखते हुए फसल की गिरदावरी शुरू करवा दी है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार अकालग्रस्त इलाकों की घोषणा कर उन स्थानों पर लोगों को रोजगार मुहैया कराने के साथ ही राजस्व वसूली रोकने का फैसला करेगी।

मौसम विभाग भले ही इस बार देश में मानसून सामान्य बता रहा है पर राजस्थान के एक दर्जन से ज्यादा जिलों में अकाल के हालात साफ दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग ने अब मानसून की विदाई की भी घोषणा कर दी है। प्रदेश के पश्चिमी जिलों में तो इस बार दस साल बाद अकाल की दस्तक हो गई है। इन जिलों में तो किसान खेतों में खड़ी जली फसल समेंटने का काम कर रहे हैं। गांवों में चारे-पानी का संकट हो गया है। प्रदेश के बाडमेर, जैसलमेर, जालोर, सिरोही, पाली,जोधपुर, नागौर, बीकानेर आदि जिलों में तो स्थिति काफी गंभीर हो गई है। जालोर और सिरोही जिलों में तो पशुपालन ही लोगों के लिए बड़ा रोजगार है। इन जिलों के पशुपालक तो अब अपने पशुओं के साथ पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग को मौसम विभाग से मिली सूचना के मुताबिक राजस्थान में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल सौ मिलीमीटर बारिश कम हुई है। पिछले साल अगस्त महीने में ही 407 मिलीमीटर बारिश हो गई थी। इस वर्ष सितंबर के मध्य तक सिर्फ 312 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है हालांकि सामान्य के मुकाबले यह आंकड़ा सिर्फ 4 प्रतिशत ही कम है। प्रदेश के आठ जिलों बाड़मेर, जालोर, पाली, सिरोही के अलावा अजमेर, दौसा, बूंदी और टोंक जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। पश्चिमी राजस्थान जिसे मारवाड़ संभाग कहा जाता है के बाड़मेर,जैसलमेर और जालोर जिलों में तो 60 फीसद बारिश कम हुई है। इन जिलों में तो खरीफ की 80 फीसद फसल जल कर नष्ट हो गई है।

राजस्थान किसान यूनियन के रामपाल जाट का कहना है कि प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में फसलें बर्बाद हो गई हैं। पश्चिमी राजस्थान में तो आने वाले महिनों में भयावह हालात हो जाएंगे। बाड़मेर जिले में तो 16 लाख हैक्टेयर बुवाई का लक्ष्य था। इसके मुकाबले 13 लाख में बुवाई की गई। इसके बावजूद बारिश न होने से 80 फीसद फसल बर्बाद हो गई। इन इलाकों के गांवों में तो अभी से अकाल के भीषण हालात बन गए हैं। इन क्षेत्रों के किसानों के पास रोजगार का अब कोई साधन नहीं है और साथ में बीमारियों ने भी दस्तक दे दी है। इस कारण आम आदमी की क्रय शक्ति खत्म हो गई है। जाट का कहना है कि सरकार को फौरन ही इन इलाकों में राहत काम शुरू करना चाहिए और लोगों की चिकित्सा की व्यवस्था भी फौरन करनी चाहिए। इन इलाकों की नहरों में भी पानी नहीं आ रहा है। इन क्षेत्रों में जून में पहली बरसात के साथ ही बाजरा, ग्वार, मूंग आदि की बुवाई की गई थी। बारिश न होने से खड़ी फसल ही बर्बाद हो गई।

प्रदेश के कई जिलों में बने विकट हालात के बाद आपदा प्रबंधन विभाग भी हरकत में आ गया है। विभाग अभी बारिश न होने से पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने में जुट गया है। आपदा प्रबंधन मंत्री गुलाब चंद कटारिया का कहना है कि करीब नौ जिलों में कम बारिश होने की जानकारी मिली है। प्रदेश में तीन-चार जिलों में तो औसत से बहुत कम ही वर्षा हुई है। विभाग अभी अपने स्तर पर जिलों से फसल खराब होने की जानकारी जुटा रहा है। इसके साथ ही राजस्व विभाग भी फसल खराब होने की रिपोर्ट के लिए गिरदावरी करवा रहा है। प्रदेश में यह काम 15 सितंबर से ही शुरू हो गया है। कटारिया का कहना है कि इसकी पूरी रिपोर्ट अक्तूबर के अंत तक आ जाएगी। इसके बाद ही सरकार के स्तर पर जिलों में अकाल के हालात घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होगी। जिलों में जरूरत पड़ने पर चारा निकासी पर रोक भी लगाई जाएगी। इसके साथ ही जिन जिलों में लोगों की जीविका का साधन पशुपालन है उनमें चारा भिजवाने की व्यवस्था की जाएगी।

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