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पुलिस कस्टडी में दलित की मौत, घरवालों का आरोप- पुलिसवालों ने मृतक की भाभी का किया गैंगरेप

महिला के पति ने शनिवार (13 जुलाई, 2019) को जयपुर में पत्रकारों को बताया, '30 जून को चोरी के एक केस में पुलिस मेरे भाई (22) को पकड़कर ले गई। तीन जुलाई को पुलिस उसे वापस घर ले आई मगर उसी दिन फिर उठाकर ले गई। वो (पुलिस) मेरी पत्नी को भी साथ ले गए।'

Author July 14, 2019 8:12 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

राजस्थान के चुरु जिले में एक 35 वर्षीय दलित महिला के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने महिला संग गैंगरेप किया और चोरी के एक मामले में अवैध रूप से करीब आठ दिनों तक हिरासत में रखा। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 6 जुलाई को महिला के देवर को गिरफ्तार किया गया और उसी रात उसकी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले की न्यायिक जांच की जा रही है।

महिला के पति ने शनिवार (13 जुलाई, 2019) को जयपुर में पत्रकारों को बताया, ’30 जून को चोरी के एक केस में पुलिस मेरे भाई (22) को पकड़कर ले गई। तीन जुलाई को पुलिस उसे वापस घर ले आई मगर उसी दिन फिर उठाकर ले गई। वो (पुलिस) मेरी पत्नी को भी साथ ले गए। बाद में छह और सात जुलाई की रात पुलिस ने मेरे भाई पर खूब अत्याचार किए और उसकी हत्या कर दी। मेरी पत्नी जो इस अत्याचार की गवाह थी उसके साथ पुलिस ने गैंगरेप किया। उन्होंने उसके नाखुन भी उखाड़ दिए। उसकी आंखों और उंगलियों को नुकसान पहुंचाया गया।’ महिला के पति ने आगे बताया कि भाई की हत्या के बाद भी पुलिस ने जबरन पत्नी को 10 जुलाई तक पुलिस हिरासत मे रखा।

महिला के परिवार द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद कार्मिक विभाग ने शुक्रवार देर रात एक आदेश जारी किया। जिसके बाद चुरु के एसपी राजेंद्र कुमार शर्मा को हटा दिया गया। इसके अलावा संबंधित पुलिस सर्कल के अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया है। इससे पहले दलित की पुलिस हिरासत में मौत के बाद संबंधित पुलिस स्टेशन के एसएचओ, एक हेड कांस्टेबल और छह कांस्टेबल को एसपी ने निलंबित कर दिया था।

मामले में पीड़िता महिला के एक अन्य देवर ने बताया, ‘6 जुलाई को पुलिस मेरे भाई को गांव ले आई और कहा गया कि यह आखिरी बार है जब वह अपने परिवार को देख सकेगा। इसके बाद करीब आठ दिनों तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद यानी 10 जुलाई को जब मेरी भाई वापस घर आईं तब उसकी हालत बहुत नाजुक थी।’

महिला की हालत देखते हुए उसे 11 जुलाई को जयपुर के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जिसके बाद परिवार ने शुक्रवार को अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोपियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की गई। एक तरफ जहां परिजनों का दावा है कि पुलिस दलित सख्स को 30 जून को उठाकर ले गई जबकि पुलिस का कहना है कि उसे जुलाई को राउंडअप किया गया।

मामले में चुरु के एएसपी प्रकाश कुमार शर्मा ने बताया, ‘3 जुलाई को पुलिस को सूचना मिली की एक संदिग्ध चोर को गांव के करीब में पकड़ा गया है। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो पता चला कि युवक को भीड़ ने बुरा तरह पीटा था। बाद में उसे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहां छानबीन में पता चला कि बीती साल उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। ये एफआईआर चोरी के एक एल्जाम में उसी गांव के एक शख्स ने दर्ज कराई। हालांकि उक्त मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई।’ एएसपी ने दावा किया तीन जुलाई को ही दलित शख्स को उसके घर वापस भेज दिया गया था।

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