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राजस्थान: पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने में नाकाम पर्यटन महकमा

राजस्थान में पर्यटन सीजन की शुरुआत होने वाली है पर पर्यटकों की सुविधाओं की तरफ सरकार का कोई ध्यान ही नहीं है।

Author August 22, 2018 6:18 AM
घाटे के कारण सरकार का पर्यटन विकास निगम बंद होने के कगार पर पहुंच गया है।

राजस्थान में पर्यटन सीजन की शुरुआत होने वाली है पर पर्यटकों की सुविधाओं की तरफ सरकार का कोई ध्यान ही नहीं है। पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बना पर्यटन विकास निगम बदहाली की तरफ बढ़ गया है। साथ में सरकार का पर्यटन विभाग भी अपने नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाने में लगा है। प्रदेश में पर्यटकों के लिए साल 2010 में बनाया गया पर्यटन अधिनियम भी मखौल बन गया है और देसी-विदेशी पर्यटकों को गैरकानूनी तरीकों से गाइड बने लोगों के हाथों लुटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पर्यटन विभाग के अधीन काम करने वाला पर्यटक सहायता बल भी पर्यटकों की मदद करने में नाकाम साबित हो रहा है।

घाटे के कारण सरकार का पर्यटन विकास निगम बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। सरकार इसके कई होटलों के साथ दूसरे प्रदेशों में स्थित पर्यटक केंद्रों को भी बंद करती जा रही है। निगम के पास प्रदेश के कई शहरों में बेशकीमती इलाकों में अपनी जमीन पर होटल हैं और अब इन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली गई है। निगम ने बीते साल अपनी 15 इकाइयां बंद कर दीं। इससे पहले उसकी 27 इकाई सिर्फ घाटे के नाम पर बंद कर दी गई थीं। निगम ने घाटा कम करने के लिए अब तक 500 कर्मचारियों को दूसरे महकमों में समायोजित कर दिया है।

इन कर्मचारियों को 2014 से ही दूसरे विभागों में भेजना शुरू कर दिया गया था। इससे घाटा तो कम नहीं हुआ उलटे और बढ़ता चला गया। निगम का राजस्व भी पांच साल में 88 करोड़ रुपए से घटकर 50 करोड़ रह गया। निगम का मौजूदा घाटा भी 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है। निगम की बुरी दशा का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि इसके अमदाबाद और क ोलकाता दफ्तरों को बंद कर उन पर ताले लगाने का आदेश जारी कर दिया गया है। इससे पहले चेन्नई और मुंबई केंद्रों को बंद किया गया था। निगम का अब एकमात्र पर्यटक कार्यालय दिल्ली में ही बचेगा। इसे भी सुधार के नाम पर एक निजी कंपनी को सौंपने की रूपरेखा बना ली गई है। इसके बाद राज्य के बाहर राजस्थान पर्यटन निगम का कोई दफ्तर ही नहीं बचेगा। इन दफ्तरों के जरिये पर्यटक अपनी बुकिंग भी कराते थे जो अब बंद हो जाएगी।

राजस्थान पर्यटन विकास निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष तेज सिंह राठौड़ का कहना है कि घाटे के नाम पर निगम की यूनिटें साजिश के तहत बंद की जा रही है। इन्हें निजी हाथों में सौंपने के लिए ही निगम को बंद करवाया जा रहा है। उनका आरोप है कि इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि पहले निगम की आय के सारे स्त्रोत बंद किए गए। इसे घाटे में षड्यंत्र के तहत पहुंचाया गया। पर्यटन विभाग के कर्मचारी हमेशा पर्यटकों की सुविधाओं को लेकर चिंतित रहते हैं और सरकार को समय- समय पर सुझाव भी देते हैं। पर्यटकों की सुविधाओं की तरफ तो सरकार को ही गौर कर कार्रवाई करनी चाहिए। अफसरों और नेताओं की मिलीभगत के कारण बदहाल हालात हुई।

पर्यटन राज्य मंत्री कृष्णेंद्र कौर दीपा का कहना है कि सरकार प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए कई कदम उठा रही है। इसके कारण प्रदेश में पयर्टकों की आवक बहुत ज्यादा हुई है और प्रदेश को कई पुरस्कार भी मिले हैं। विदेशी पर्यटकों की आवक के मामले में तो देश में राजस्थान अब पांचवें नंबर पर पहुंच गया है। प्रदेश से बाहर के तीन पर्यटक सहायता केंद्रों मुंबई, अमदाबाद और कोलकाता में दफ्तर फिर से शुरू करने का फैसला किया गया है। पर्यटन राज्य मंत्री का कहना है कि पर्यटकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए पर्यटक सहायता बल को मजबूती देने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए सभी अहम स्थानों पर बल के जवानों को तैनात किया जा रहा है और इनके नंबरों को भी सभी जगहों पर प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यटकों की मदद करने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

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