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यह कैसा इंसाफ: बच्ची से टूटा अंडा तो जाति पंचायत ने किया सामाजिक बहिष्कार

राजस्थान के हिंडौली में बच्ची का सामाजिक बहिष्कार, जाति पंचों पर दर्ज होगी प्राथमिकी

Author जयपुर, 12 जुलाई। | July 13, 2018 06:29 am
राजस्थान के बूंदी जिले के एक गांव में छह साल की मासूम बच्ची को अंधविश्वास के चलते जाति पंचों ने उसे समाज से बहिष्कृत करने का दंड देकर तमाम कानूनों की धज्जियां उड़ा दीं।

राजस्थान के बूंदी जिले के एक गांव में छह साल की मासूम बच्ची को अंधविश्वास के चलते जाति पंचों ने उसे समाज से बहिष्कृत करने का दंड देकर तमाम कानूनों की धज्जियां उड़ा दीं। इसके उजागर होने के बाद अब प्रशासन और पुलिस के साथ ही मानवाधिकार और बाल संरक्षण आयोग भी सक्रिय हो गए हैं। बाल संरक्षण आयोग ने तो दोषी जाति पंचों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर सख्ती बरतने का आदेश दिया है। यह मामला राजस्थान के बूंदी जिले के हिंडौली कस्बे में हुआ। स्कूल में दो जुलाई को एक बच्ची का पांव पक्षी टिटहरी के घोंसले पर पड़ गया। इससे टिटहरी का अंडा फूट गया। इस पर गांव में जाति पंचायत बैठ गई।

जाति पंचायत ने इसे बड़ा अपशकुन मानकर बच्ची को सामाजिक बहिष्कार का दंड दे डाला। पंचायत ने बच्ची को जीव हत्या का दोषी करार दिया। पंचायत ने बच्ची को जाति से बाहर कर दिया और बच्ची को करीब दस दिन तक अपने घर के बाहर टीनशैड में बिताने पड़े। इसकी जानकारी बुधवार को जिला मुख्यालय बूंदी तक पहुंच गई और कलेक्टर महेश चंद शर्मा ने फौरन ही तहसीलदार और थानेदार को मौके पर भेजा। इसके बाद प्रशासन और पुलिस के अफसरों ने गांव में पहुंच कर पंचों पर दबाव बना कर बच्ची की घर वापसी कराई। राज्य मानवाधिकार आयोग में मामला पहुंचा तो उसने कलेक्टर और एसपी से फौरन पूरी तथ्यात्मक रपट मंगवाई है। जाति पंचायत ने पीड़िता के पिता पर जुर्माना भी लगाया। पंचायत के खौफ के कारण पिता मामले को उजागर करने से भी डर रहा है।

इस घटना की जानकारी जयपुर पहुंची और अधिकारी सक्रिय हो गए। राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मनन चतुर्वेदी गुरुवार को बूंदी जिले के गांव पहुंच गई। उन्होंने उन पंचों से मुलाकात की जिन्होंने बच्ची को सामाजिक बहिष्कार की सजा दी। चतुर्वेदी ने पंचों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने पंचों से कहा कि अंधविश्वास के चलते बच्ची को उसके माता-पिता से अलग नहीं किया जा सकता है। चतुर्वेदी ने बताया कि गांव में दूसरी कई तरह की समस्याएं भी सामने आई हैं, पर आयोग के सामने अभी एफआइआर दर्ज करवा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करवाना पहली प्राथमिकता है।

बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष चतुर्वेदी का कहना है कि जागरूकता के अभाव के चलते ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। इस घटना की जानकारी गांव के गोशाला संचालक ने कुछ लोगों को दी थी। तहसीलदार भावना सिंह ने गांव पहुंच कर जाति पंचों को ऐसी हरकत के लिए फटकार लगाई तो उन्होंने कानून की जानकारी नहीं होने की बात कही और बच्ची को सम्मान के साथ घर वापसी का वादा किया।

राजस्थान बाल संरक्षण आयोग का दौरा, सख्त कार्रवाई का आदेश

अंधविश्वास की हद

राजस्थान के हिंडौली कस्बे के स्कूल में दो जुलाई को बच्ची का पांव पक्षी टिटहरी के घोंसले पर पड़ गया। इससे टिटहरी का अंडा फूट गया। इस पर गांव में जाति पंचायत बैठ गई। जाति पंचायत ने इसे बड़ा अपशकुन मानकर बच्ची को सामाजिक बहिष्कार का दंड दे डाला।

दस दिन घर से बाहर बिताए

पंचायत ने बच्ची को जीव हत्या का दोषी करार दिया। पंचायत ने बच्ची को जाति से बाहर कर दिया और बच्ची को करीब दस दिन तक अपने घर के बाहर टीनशैड में बिताने पड़े। इसकी सूचना बुधवार को जिला मुख्यालय बूंदी तक पहुंच गई और गांव में अधिकारी भेजे गए।

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