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राजस्थान विधानसभा चुनाव- 200 में से 100 सीटों पर नए चेहरे उतार सकती है बीजेपी

सत्ता विरोधी लहर से निपटने की चुनौती - राजस्थान विधानसभा चुनाव

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

राजस्थान में दिसम्बर की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले है। राजनैतिक पार्टियां चुनावों में अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने में जुटी है। इन चुनावो में बीजेपी लगभग 100 सीटों पर नए चेहरों को चुनाव लड़ाने का मन बना रही है। चुनावों में बीजेपी की नए चेहरों पर दांव लगाने की बड़ी वजह, राज्य में भाजपा की सरकार के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का होना माना जा रहा है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल भाजपा द्वारा राज्यभर में कराये गए फीडबैक प्रोग्राम में भी ये बात निकलकर सामने आयी थी।

नए उमीदवार लड़ाने की ये है वजह
राज्य में 7 दिसम्बर से विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन चुनाव से पहले ही पार्टी के अंदर आयी एक आंतरिक रिपोर्ट ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है। दरअसल, चुनाव से पहले बीजेपी के मंत्रियों और विधायकों पर आये नकारात्मक फीडबैक के चलते सीएम वसुंधरा राजे पर लगातार दबाव बना हुआ है इसलिए शायद पार्टी को कुल 200 विधानसभा सीटों में से कम से कम 100 सीटों पर नए चेहरे उतारने पड़ सकते है।

पार्टी में दिग्गजों की हालत भी है डावांडोल
चुनाव से पूर्व पार्टी को मिले पदाधिकारियों के फीडबैक में, जहां सत्ता विरोधी लहर की बात ने पार्टी को को चिंता में डाल दिया था, तो वहीं अब नाम ना बताने की शर्त पर पार्टी की चुनाव समिति के एक सदस्य वरिष्ठ बीजेपी नेता जो बात बताई है उससे पार्टी और भी सकते में आ सकती है। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार में वरिष्ठ मंत्रियों जैसे, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग मंत्री सुरेंद्र गोयल, पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान और देवस्थान मंत्री राजकुमार रिन्वा समेत 6 कैबिनेट मंत्रियो के खिलाफ जनता में भारी रोष है और इन 6 कैबिनेट मंत्रियो पर टिकट कटने की तलवार लटक रही है।

दोबारा नहीं जीतते ऐसे विधायक
राजस्थान विधानसभा चुनावों में आमतौर पर ये देखने को मिला है कि अगर सत्ताधारी दल अपने मौजूदा विधायकों को टिकट देती है, तो उन प्रत्याशियों को हार नसीब होने का इतिहास रहा है। 2008 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 68 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिये थे जो 2003 में भी चुनाव लड़ चुके थे, तब 13 मंत्रियों सहित 40 मौजूदा विधायकों को हार नसीब हुई थी। केवल 28 उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके थे। 2013 के चुनावों में यही हाल सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी का भी रहा जहां उसने 2008 के विधानसभा चुनावों में लड़ चुके 105 उम्मीदवारो को टिकट दिए लेकिन उनमे सिर्फ 14 ही जीत हासिल कर सके।

सत्ता विरोधी लहर कम करने को अपनाया ये तरीका
एक बीजेपी नेता ने बताया कि बीजेपी के कई नेताओ ने एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर को कम करने के लिए अपनी पुरानी सीटों से चुनाव ना लड़कर नयी सीट से चुनाव लड़ना हितकर समझा, जिसका लाभ भी उन्हें मिला और उन्होंने जीत भी हासिल की थी। जीती हुई विधानसभा सीट को छोड़कर नयी सीट से चुनाव लड़ने वालों में चुनाव बीजेपी के तत्कालीन राज्य सरकार में मंत्री राजेंद्र सिंह राठौर, प्रभु लाल सैनी, और वरिष्ठ भाजपा नेता नरपत सिंह राजवी जैसे लोग शामिल है।

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