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पार्टी लाइन से हटे अशोक गहलोत, खुद को सीएम प्रोजेक्‍ट करते हुए कहा- अब किस चेहरे की तलाश है

साल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसीलिए पार्टी की कवायद है कि मुख्यमंत्री का नाम घोषित न करके पार्टी के नेताओं के बीच गुटबंदी न होने दी जाए।

Author Updated: July 29, 2018 2:25 PM
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत। Express Photo By Amit Mehra

निकट भविष्य में देश के तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में अपने नेताओं के पक्ष में बयानबाजी का सिलसिला भी तेज हो गया है। राजस्थान में पूर्व केंद्रीय मंत्री लाल चंद कटारिया ने बीते गुरुवार (26 जुलाई) को कहा था कि कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। अब कटारिया के बयान पर खुद गहलोत ने अपनी प्रतिक्रिया जता दी है। उन्होंने भी कहा, दस साल से जो चेहरा आपके सामने है, उसके अलावा अब किस चेहरे की तलाश है?

शनिवार (28 जुलाई) को पूर्व सीएम अशोक गहलोत उदयपुर में थे। सर्किट हाउस में जब पत्रकारों ने उनसे कटारिया के बयान के बारे में पूछा तो उन्होंंने कहा,”मैं काम को लेकर पंजाब और गुजरात में व्यस्त था। यहां लोगों ने अफवाह फैला दी कि गहलोत राजस्थान से चले गए। मैं फिर कहता हूं- मैं थां सूं दूर नहीं (मैं अापसे दूर नहीं हूं)। क्या जनता की आवाज आप बनेंगे? इस पर गहलोत ने कहा कि खलक की आवाज खुदा की आवाज होती है।

हालांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने लाल चंद कटारिया के बयान का खंडन करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव होगा, जिसमें सभी वरिष्ठ नेताओं का सामूहिक योगदान व भूमिका होगी। सभी कांग्रेस नेताओं को अनर्गल बयानबाजी व औचित्यहीन वक्तव्य नहीं देने चाहिए। राष्ट्रीय हाईकमान ऐसे सभी गैर जिम्मेदराना वक्तव्यों के प्रति बेहद गंभीर है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री लालचंद कटारिया के बयान पर गहलोत ने कहा कि कुछ फॉलोअर्स अति उत्साह में बोल जाते हैं। गहलोत से पूछा गया कि राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे ने कटारिया के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। इस पर गहलोत ने मुस्कराते हुए कहा कि अविनाश पांडे ने भी अति उत्साह में बोल दिया होगा। जो जीत सकें उन्हें टिकट मिलना चाहिए। यह कभी नहीं होना चाहिए कि कौन किसका आदमी है।

बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इन चुनावों को कांग्रेस लोकसभा के सेमीफाइनल की तरह खेलना चाहती है। इसीलिए पार्टी की कवायद है कि मुख्यमंत्री का नाम गुप्‍त रखकर पार्टी के नेताओं के बीच गुटबंदी न होने दी जाए। लेकिन नेताओं की महत्वाकांक्षाएं खुलकर आना जरूर पार्टी नेताओं के लिए चिंता का सबब हो सकता है।

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