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पढ़ी-लिखी है अशोक गहलोत की कैबिनेट, आठ मंत्रियों के खिलाफ दर्ज हैं आपराधिक मामले

कैबिनेट के आठ मंत्रियों लाल चंद कटारिया, विश्वेन्द्र सिंह, रमेश चंद मीणा, अर्जुन सिंह बामणिया, भंवर सिंह भाटी, अशोक चांदना, भजन लाल और टीकाराम जैली के खिलाफ मामलें लंबित हैं।

Author Updated: December 25, 2018 12:54 PM
कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत पहले एक जादूगर थे, जो बाद में राजनीति के जादूगर बन गए. (एक्सप्रेस फोटो/ रोहित जैन पारस)

राजस्थान में सोमवार को अशोक गहलोत की कैबिनेट के मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की है। बता दें कि मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों में से तीन के पास पीएचडी, छह के पास एलएलबी, दो के पास एमबीए तथा एक के पास इंजीनियरिंग की डिग्री है। जबकि सात विधायकों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक से कम है। वहीं मंत्रिमंडल में शपथ लेने वाले 23 विधायकों में से 8 विधायकों पर पुलिस में मामले दर्ज हैं और दो मंत्रियों को छोड़कर अधिकतर सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं।

करौली जिले के सपोटरा से विधायक चुने गये रमेश चंद मीणा को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। मीणा ने 1993 में सिविल इंजीनियंरिग में स्नातक की पढाई पूरी की थी। वहीं कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले डॉक्टर बी डी कल्ला, डॉक्टर रघु शर्मा और राष्ट्रीय लोकदल के विधायक डॉक्टर सुभाष गर्ग के पास डॉक्टर ऑफ फिलॉसोफी की डिग्री है। हालाँकि कल्ला और रघु शर्मा के पास कानून में स्नातक की डिग्री भी है। बता दें कि निर्वाचन विभाग को चुनाव के लिये पेश शपथ पत्र के अनुसार शपथ लेने वाले विधायकों में शांति धारीवाल, गोविंद सिंह डोटासरा, सुखराम विश्नोई और टीकाराम जैली भी कानून में स्नातक हैं। वहीं रघु शर्मा और मंत्रिमंडल में शामिल एक मात्र महिला मंत्री ममता भूपेश के पास एमबीए की डिग्री है।

बता दें कि राज्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले भजन लाल जाटव की शैक्षणिक योग्यता 10वीं है, वहीं कैबिनेट मंत्री उदय लाल और राज्य मंत्री अर्जुन बामणिया स्नातक के द्वितीय वर्ष और पांच मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता सैकंडरी और उसके बराबर है। कैबिनेट के आठ मंत्रियों लाल चंद कटारिया, विश्वेन्द्र सिंह, रमेश चंद मीणा, अर्जुन सिंह बामणिया, भंवर सिंह भाटी, अशोक चांदना, भजन लाल और टीकाराम जैली के खिलाफ मामलें लंबित हैं। वहीं 10 मामलें युवा मंत्री अशोक चांदना के खिलाफ दर्ज हैं।

बूंदी, करौली, जोधपुर, जयपुर और भीलवाड़ा में विभिन्न आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों में से आठ मामले सरकारी कामकाज में बाधा डालने के हैं। वहीं एक मामला बिना स्वीकृति के बैठक आयोजित करने और सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन करने और एक मामला श्रीगंगानगर में गन का लाईसेंस लेने के लिये गलत दस्तावेज और गलत पता देने के लिये दर्ज है।

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